Mauganj News: मऊगंज : मऊगंज जिले में कानून व्यवस्था और यातायात प्रबंधन किस कदर वेंटिलेटर पर है, इसकी बानगी आज पन्नी के पास देखने को मिली। एक घंटे पहले भीषण एक्सीडेंट होता है, लोग अपनों को खोने के गम और गुस्से में सड़क जाम कर देते हैं, गाड़ी में तोड़ फोड़ होती है लेकिन मऊगंज पुलिस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। आखिर क्यों? क्या मऊगंज की आम जनता को उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है?
Mauganj News: सवाल गहरा है और जवाब उससे भी ज्यादा कड़वा। मऊगंज में ओवरलोड हाइवा आम जनता के लिए ‘काल’ बनकर बरस रहे हैं। पन्नी की ये घटना कोई पहली नहीं है, कुछ दिन पहले हनुमना में भी ऐसा ही तांडव देखा गया था। लेकिन मजाल है कि जिले के यातायात प्रभारी इन ‘सफेद हाथियों’ पर लगाम कस सकें! इनकी पूरी बहादुरी सिर्फ मोटरसाइकिल और कार सवारों का चालान काटने तक सीमित है।
Mauganj News: अगर मऊगंज पुलिस और यातायात विभाग की कुंडली खंगाली जाए और चालानों का परीक्षण हो, तो हकीकत आईने की तरह साफ हो जाएगी। रिकॉर्ड गवाह है कि बालू और गिट्टी से लदे इन मौत के सौदागरों पर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन की कलम की स्याही सूख जाती है। आरोप तो यहाँ तक लग रहे हैं कि यातायात प्रभारी शहर की व्यवस्था सुधारने के बजाय शहर से बाहर जाकर सिर्फ वसूली और लोगों को परेशान करने में व्यस्त हैं।
Mauganj News: हैरानी की बात तो यह है कि मऊगंज थाना की कमान ऐसे हाथों में सौंपी गई है, जिनके पास थाना चलाने का पर्याप्त अनुभव ही नहीं है। यही वजह है कि शहर में ‘नो-एंट्री’ के बावजूद ओवरलोड गाड़ियां धड़ल्ले से प्रवेश कर रही हैं।
Mauganj News: जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में मूकदर्शक बन जाए, तो जनता गुहार किससे लगाए? आज पन्नी में हुआ बवाल सिर्फ एक एक्सीडेंट का गुस्सा नहीं है, बल्कि यह मऊगंज पुलिस की संवेदनहीनता के खिलाफ जनता का आक्रोश है। अब देखना यह है कि प्रशासन की नींद कब टूटती है, या फिर किसी और लाश के सड़क पर बिछने का इंतजार किया जा रहा है?









