CG NEWS: रायगढ़: रायगढ़ जिले में चल रही भारतमाला सड़क परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मुआवजा वितरण और जमीन अधिग्रहण को लेकर पहले से सवालों के घेरे में रही इस परियोजना पर अब वन भूमि को नुकसान पहुंचाने और बड़ी संख्या में पेड़ों के गायब होने के आरोप लगे हैं। मामला धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र के सिसरिंगा घाट इलाके का है, जहां सड़क निर्माण कार्य जारी है।
CG NEWS: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान तय सीमा से अधिक वन भूमि पर खुदाई की गई। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए जितनी जमीन स्वीकृत थी, उससे कहीं ज्यादा क्षेत्र में भारी मशीनों से खुदाई कराई गई, जिससे वन क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
CG NEWS:ग्रामीणों के मुताबिक, खुदाई के दौरान सागौन सहित कई बेशकीमती पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया। आरोप है कि कुछ दिनों बाद ये पेड़ रहस्यमयी तरीके से मौके से गायब भी हो गए। हालांकि घटनास्थल पर अब भी टूटे हुए तने और पेड़ों के अवशेष दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उखाड़े गए पेड़ों का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
CG NEWS:स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण की आड़ में वन क्षेत्र का अतिक्रमण किया गया है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य अधिग्रहित सीमा से बाहर तक फैल गया, जिससे आसपास के सरकारी जल स्रोतों, निजी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पर्यटन स्थल के रूप में पहचाने जाने वाले सिसरिंगा घाट क्षेत्र में बिना पर्याप्त निगरानी के तेजी से काम कराया गया।
CG NEWS:मामले को लेकर कंपनी प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों के बयान भी अलग-अलग सामने आए हैं। परियोजना से जुड़े प्रदीप सिंह ने पूरे मामले की जानकारी होने से इनकार किया है।
CG NEWS:वहीं डी.पी. सोनवानी का कहना है कि भारतमाला परियोजना के लिए चिन्हित पेड़ों की कटाई विभागीय प्रक्रिया के तहत की गई थी। दूसरी ओर जॉन तिग्गा ने दावा किया कि परियोजना से जुड़े पेड़ों की कटाई वर्षों पहले पूरी हो चुकी थी और हाल के समय में विभाग द्वारा कोई नई कटाई नहीं की गई।
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CG NEWS:वन विभाग के अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों के बाद अब मामला और गंभीर हो गया है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि हाल में किसी वैधानिक कटाई की अनुमति नहीं दी गई, तो फिर निर्माण स्थल से बड़ी संख्या में पेड़ आखिर गायब कैसे हो गए।
CG NEWS:ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वन भूमि को हुए नुकसान का आकलन करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इलाके में यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है।









