Nirav Modi Loan Case: नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी Nirav Modi को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन की एक अदालत ने उन्हें Bank of India को 10.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (100 करोड़ रुपये से अधिक) चुकाने का आदेश दिया है।
यह मामला दुबई स्थित कंपनी Firestar Diamond FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा है। अदालत ने माना कि कंपनी के कर्ज का भुगतान न होने की स्थिति में नीरव मोदी व्यक्तिगत रूप से इसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य हैं।
Nirav Modi Loan Case: 2012 में लिया गया था लोन
बैंक ऑफ इंडिया ने वर्ष 2012 में यह लोन मंजूर किया था। उसी साल 3 अगस्त को नीरव मोदी ने एक व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें उन्होंने कंपनी के डिफॉल्ट करने पर कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी।
अदालत के अनुसार, बकाया मूल राशि करीब 4.1 मिलियन डॉलर (लगभग 39 करोड़ रुपये) है। इस पर ब्याज और अन्य देनदारियां जोड़ने के बाद कुल राशि 10.7 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई है। यानी नीरव मोदी को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना होगा।
Nirav Modi Loan Case: बैंक ने शुरू की थी वसूली
कंपनी द्वारा कर्ज नहीं चुकाने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर वसूली की कार्रवाई शुरू की। बैंक ने कई बार नोटिस भेजे, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।
नीरव मोदी की दलील खारिज
नीरव मोदी की कानूनी टीम ने अदालत में दावा किया कि बैंक द्वारा भेजे गए नोटिस वैध नहीं थे और उन्हें कुछ नोटिस मिले भी नहीं। लेकिन अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।कोर्ट ने माना कि नोटिस सही तरीके से जारी किए गए थे। यहां तक कि एक नोटिस उस ब्रिटिश जेल में भी भेजा गया था, जहां नीरव मोदी फिलहाल बंद हैं।
Nirav Modi Loan Case: ईमेल बना अहम सबूत
Nirav Modi Loan Case: सुनवाई के दौरान अदालत ने नीरव मोदी के एक ईमेल का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि मीडिया रिपोर्टों और जांच के कारण उनके कारोबारी समूह की स्थिति खराब हो गई थी और कंपनियां अपने कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं थीं।
Nirav Modi Loan Case: इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया कि बैंक ऑफ इंडिया को कर्ज की वसूली और व्यक्तिगत गारंटी लागू करने का पूरा अधिकार है। यह फैसला नीरव मोदी के लिए ब्रिटेन में एक और बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।









