[Nishaanebaz] Bhopal News: भोपाल। राजधानी भोपाल में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के रखरखाव से जुड़ी एक बड़ी समस्या अब खत्म होने की ओर है। पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से कालियासोत डैम के बैकवाटर में मौजूद बिजली टावरों तक पहुंचना तकनीकी कर्मचारियों के लिए चुनौती बना हुआ था। डैम का जलस्तर बढ़ने पर कई टावर पानी से घिर जाते थे। ऐसे में निरीक्षण और मरम्मत के लिए कर्मचारियों को नाव के जरिए मगरमच्छों की मौजूदगी वाले पानी से होकर गुजरना पड़ता था।
अब इस जोखिम भरे सफर को खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है। एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी (MP Transco) ने डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन टावरों और लाइनों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया है।
1980 के दशक में बिछाई गई थीं ट्रांसमिशन लाइनें
कालियासोत क्षेत्र में मौजूद ट्रांसमिशन नेटवर्क की कई लाइनें 1980 के दशक में बिछाई गई थीं। इनमें 132 केवी क्षमता वाले कई टावर ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जो डैम का जलस्तर बढ़ने पर पानी से घिर जाते हैं।
मानसून के दौरान जब बैकवाटर का स्तर बढ़ता था, तो इन टावरों तक जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल हो जाता था। इसके बाद बिजली कर्मचारियों को नाव के जरिए टावरों तक पहुंचकर लाइन और उपकरणों का निरीक्षण करना पड़ता था।
मगरमच्छों के बीच नाव से पहुंचती थी टीम
Bhopal News: कालियासोत डैम के बैकवाटर में मगरमच्छों की मौजूदगी के कारण यह काम और भी जोखिम भरा हो जाता था। बिजली के हाई-वोल्टेज टावरों के पास पहुंचने के साथ ही कर्मचारियों को पानी में मौजूद मगरमच्छों से भी सतर्क रहना पड़ता था।
अब टावरों को डैम के डूब क्षेत्र से बाहर शिफ्ट किए जाने के बाद कर्मचारियों को इस तरह की परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे ट्रांसमिशन नेटवर्क के रखरखाव का काम भी अधिक सुरक्षित और आसान हो सकेगा।
साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य
Bhopal News: MP Transco ने टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों को सुरक्षित क्षेत्र में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक मानसून के कारण निर्माण और शिफ्टिंग की रफ्तार प्रभावित हो सकती है, लेकिन परियोजना को इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कालियासोत डैम के जलस्तर बढ़ने पर बिजली कर्मचारियों को टावरों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
शहर के बड़े हिस्से को मिलेगा फायदा
MP Transco के प्रबंध निदेशक नील तिवारी ने बताया कि इस बदलाव से शहर के बड़े हिस्से को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पहले मेंटेनेंस के दौरान टीमों को नाव से बैकवाटर पार करना पड़ता था, क्योंकि ट्रांसमिशन लाइनें डैम के पानी से होकर गुजरती थीं।
Bhopal News: उन्होंने बताया कि टावरों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया बिजली व्यवस्था को और बेहतर तथा व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद कालियासोत डैम में पानी बढ़ने के दौरान बिजली टावरों तक पहुंचने की करीब 30 साल पुरानी चुनौती खत्म होने की उम्मीद है।

