Kanger Ghati National Park : वन्यजीवों की जान से खेल, शिकारी मस्त, विभाग व्यस्त… कांगेर बना निशाना

VIKASH KHALKHO
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Kanger Ghati National Park : बस्तर। बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में एक बार फिर वन विभाग की ‘कड़ी निगरानी’ की पोल खुल गई। गुरुवार दोपहर पेदावाड़ा चौक के पास एक हिरण तीर से घायल होकर दौड़ते-दौड़ते नेशनल हाईवे-30 तक पहुंच गया, जहां तड़पते हुए उसने दम तोड़ दिया। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला था, बल्कि यह भी दिखाता है कि जंगल अब जानवरों के लिए सुरक्षित नहीं बचे। राहगीरों ने घायल हिरण को देखकर तुरंत वन विभाग को सूचना दी। विभाग की टीम मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन तब तक बहती सांसें रुक चुकी थीं। घायल हिरण को बचाने की कोई तत्काल व्यवस्था नहीं थी — जैसे किसी ने मान ही लिया हो कि ये घटनाएं सामान्य हैं।

जंगल की चुप्पी में छिपी शिकारियों की आवाज़

मौके पर पहुंचे कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान के एसडीओ कमल तिवारी ने पुष्टि की कि हिरण के शरीर में तीर घुसा हुआ मिला, जिससे साफ है कि यह शिकारी हमला था। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया जाएगा, और आरोपियों की तलाश जारी है।

लेकिन सवाल यही है —
क्या कागज़ी बयानबाज़ी से जंगलों में जानवर बच पाएंगे?

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‘संवेदनशील’ जंगल या ‘शिकारियों’ की आज़ादी का क्षेत्र?

कांगेर घाटी जैसे राष्ट्रीय उद्यान में यदि हिरण को तीर मारकर घायल किया जा सकता है, और वह हाइवे तक घायल हालत में भागता है, तो इससे ज्यादा लचर वन्यजीव सुरक्षा और क्या हो सकती है?

वन विभाग अक्सर अपने ड्रोन निगरानी, गश्त, और स्थानीय नेटवर्क की बात करता है।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो शिकारी डरते हैं, न ही हिरण बचते हैं।

हाईवे बना मौत का रास्ता

जहां-जहां जंगलों के पास से नेशनल हाइवे गुजरते हैं, वहां ऐसे मामलों की आशंका और भी बढ़ जाती है।
शिकारी हमला करने के बाद जानवरों को अक्सर सड़क की ओर भागते हुए देखा गया है, जिससे दुर्घटना और शिकार — दोनों का खतरा बढ़ जाता है।

क्या कहता है वन्यजीव संरक्षण अधिनियम?

भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हिरण जैसे संरक्षित जानवर का शिकार अपराध की श्रेणी में आता है।
लेकिन प्रशासनिक सुस्ती, स्थानीय मिलीभगत और सजा का डर न होना ही शिकारियों के हौसले बुलंद कर रहे हैं।

जनता के सवाल, विभाग की चुप्पी

  • क्या हिरण के बचाव के लिए कोई फील्ड मेडिकल टीम थी?
  • क्या आसपास कोई निगरानी कैमरा था?
  • क्या उस क्षेत्र में पिछले महीने कोई गश्त हुई थी?
  • इन सवालों के जवाब में वन विभाग अब तक खामोश है।
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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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