Vedanta plant blast : सक्ती : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के सक्ती जिला स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। 14 अप्रैल को हुए इस ब्लास्ट में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 लोग झुलसे थे। इनमें से 3 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
Vedanta plant blast : आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि हादसे की जिम्मेदारी तय कर पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित किया जाए।
Vedanta plant blast : प्रारंभिक जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक फ्यूल जमा होने से दबाव अचानक बढ़ा, जिससे विस्फोट हुआ। यह भी पाया गया कि कम समय में उत्पादन बढ़ाने के लिए लोड 350 मेगावाट से लगभग 590 मेगावाट तक तेजी से बढ़ाया गया, जो हादसे का एक बड़ा कारण बन सकता है।
Vedanta plant blast : प्लांट के संचालन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एनजीएसएल कंपनी के पास थी। ऐसे में ऑपरेशन और रखरखाव से जुड़े अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। प्रोजेक्ट हेड स्तर के अधिकारियों सहित पूरी तकनीकी टीम की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
Vedanta plant blast : इस बीच, नवीन जिंदल ने इस मामले में बिना पूरी जांच के सीधे शीर्ष प्रबंधन पर कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। जिला प्रशासन ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें घटना के कारण, जिम्मेदार व्यक्ति, सुरक्षा मानकों का पालन और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी।
Vedanta plant blast : मृतकों के परिजनों को वेदांता प्रबंधन ने 35 लाख रुपए और नौकरी देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को 15 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राज्य सरकार की ओर से भी मुआवजे का ऐलान किया गया है। यह हादसा राज्य में औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।











