निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्यप्रदेश के रीवा जिले के त्यौंथर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पंछा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यहां एक पात्र हितग्राही का नाम सूची से हटाए जाने और उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को लाभ देने का आरोप लगाया गया है।
‘मेरा घर कागजों में ही रह गया’—पीड़ित की व्यथा
ग्राम पंचायत पंछा निवासी नीरज मिश्रा का कहना है कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल था। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें अपना घर मिलेगा, लेकिन जब आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उनका नाम सूची से गायब कर दिया गया।
नीरज का आरोप है कि उनके अधिकार को छीनकर किसी अन्य व्यक्ति को लाभ दे दिया गया, जिससे वह आज भी पक्के घर के इंतजार में हैं।
पंचायत से लेकर तहसील तक भटके पीड़ित
पीड़ित ने पंचायत से लेकर तहसील स्तर तक कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। कार्रवाई के नाम पर अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गड़बड़ी या सुनियोजित साजिश?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सूची में नाम होने के बावजूद किसी पात्र व्यक्ति का नाम कैसे हटाया गया? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या मिलीभगत है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह की अनियमितताएं जारी रहीं, तो सरकारी योजनाओं पर से लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
गांव के अन्य लोगों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे।
प्रशासन के लिए चुनौती बना मामला
यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।











