रायपुर: — छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर सख्ती बढ़ाते हुए सरकार ने अब हाईटेक निगरानी प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। नई रणनीति के तहत खदान क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की जाएगी, जबकि प्रमुख परिवहन मार्गों पर ई-चेक गेट स्थापित कर खनन माफिया पर शिकंजा कसा जाएगा।
आसमान से निगरानी: ड्रोन करेंगे चौकसी
खनिज विभाग ने शुरुआती चरण में 5 आधुनिक ड्रोन तैनात करने की योजना बनाई है। ये ड्रोन एरियल सर्वे, 3D मैपिंग और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों से लैस होंगे। पहले चरण में कोरिया, सूरजपुर और जांजगीर-चांपा जैसे संवेदनशील जिलों में इनकी तैनाती की जाएगी।
ड्रोन के जरिए खदानों की लीज सीमा की सटीक पहचान होगी और अवैध उत्खनन, ओवर माइनिंग व जंगल कटाई जैसी गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। विभाग के अनुसार, जहां पहले पारंपरिक गश्त से सिर्फ 30% क्षेत्र की निगरानी हो पाती थी, वहीं ड्रोन से अब लगभग 100% कवरेज संभव होगा।
ई-चेक गेट: हर वाहन पर डिजिटल नजर
राज्य के 10 प्रमुख खनिज परिवहन मार्गों पर ई-चेक गेट लगाए जाएंगे। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और कोरिया सीमा क्षेत्रों में इनकी स्थापना की जा रही है।
इन गेट्स पर कैमरा, वजन मशीन और RFID तकनीक के जरिए हर वाहन की जांच होगी। GPS लोकेशन और e-way बिल का ऑटोमैटिक सत्यापन होगा, जिससे ओवरलोडिंग या अवैध परिवहन पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह सिस्टम 24×7 काम करेगा और सारा डेटा केंद्रीय सर्वर से जुड़ा रहेगा।
सरकार की सख्ती और संयुक्त कार्रवाई
हालिया कार्रवाइयों के बाद राज्य सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए हैं कि जून तक ड्रोन और ई-चेक गेट पूरी तरह सक्रिय कर दिए जाएं।
इसके साथ ही पुलिस, वन और खनिज विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाई गई है। ड्रोन से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिससे अवैध गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई संभव होगी।
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आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से राज्य के राजस्व में सालाना लगभग 1000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही जंगलों की अवैध कटाई पर रोक लगेगी और नदियों में रेत खनन पर भी नियंत्रण मजबूत होगा।
ड्रोन आधारित 3D मैपिंग से खनन योजनाओं को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों ने तकनीक के रखरखाव और क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में खनन माफिया के खिलाफ यह हाईटेक अभियान एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।











