CG NEWS : कृष्णा नायक सुकमा/ सुकमा :- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव की खबर सामने आई है। कभी नक्सलवाद का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब शांति और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार के प्रयासों के चलते राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की गई है। इसका असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।—जहां पहले बंदूकें की गोली की आवाज़ गूंजती थीं, वहां अब बच्चों की पढ़ाई की गिनती 1,2,3,4,5,6 और A,B,C,D अ,आ,इ,ई,उ,ऊ जैसे आवाज सुनाई देने लगी है।
CG NEWS : सुकमा में बदलाव की बयार:-
सुकमा जिला,जो कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, अब विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां के गांवों में शिक्षा को लेकर नई जागरूकता देखने को मिल रही है। ओयेपारा जैसे इलाकों में, जहां पहले नक्सलियों द्वारा संचालित“जनताना स्कूल” चलते थे, अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल हो रही है।
CG NEWS : बारसे देवा का परिवार बना बदलाव की मिसाल
कभी खूंखार नक्सली और मिलिट्री दलम कमांडर के रूप में कुख्यात रहे बारसे देवा का नाम इस बदलाव की कहानी में एक अहम मोड़ लेकर आता है। 25 लाख रुपये से अधिक के इनामी रहे देवा कई बड़े हमलों में शामिल रहे थे। लेकिन उनके आत्मसमर्पण के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं।
आज उनका परिवार समाज में शिक्षा का संदेश दे रहा है। बारसे देवा का बेटा इस साल 12 वीं कक्षा की परीक्षा दे चुका है। जो इस गांव के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि पहले यहां बच्चों का स्कूल जाना लगभग न के बराबर था। वहीं, देवा का छोटे भाई बुधरा बारसे अब सिलगेर में शिक्षादूत के रूप में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वह गांव-गांव जाकर लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि बच्चे शिक्षा प्राप्त करें, न कि किसी विचारधारा के प्रचार का माध्यम बनें।
CG NEWS : जनताना स्कूल से असली शिक्षा की ओर
CG NEWS : पहले ओयेपारा में चलने वाले स्कूलों में बच्चों को माओवादी विचारधारा और संगठन से जुड़े दस्तावेज पढ़ाए जाते थे। लेकिन अब स्थानीय लोग खुद इन व्यवस्थाओं को बदलना चाहते हैं। बुधरा बारसे ने मांग की है। कि गांव में फिर से सरकारी स्कूल खोला जाए, ताकि बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उन्हें अच्छी शिक्षा मिले।
CG NEWS : *प्रशासन द्वारा नए स्कूलों की तैयारी:- *
कोंटा ब्लॉक में 22 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया है। इसके अलावा पूरे सुकमा जिले में शिक्षा के विस्तार के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, स्कूलों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बस्तर की नई पहचान बन्दूक गोली की आवाज नही बल्कि किताब के अक्षर ज्ञान ABCD जैसे स्वर सुनाई दे रही है। हैं।
CG NEWS : यह बदलाव सिर्फ नक्सलवाद के खात्मे का संकेत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक भी है। बस्तर अब धीरे-धीरे “बंदूक की छाया” से निकलकर “किताबों की रोशनी” की ओर बढ़ रहा है। यह कहानी बताती है कि जब समाज, प्रशासन और पूर्व भटके हुए लोग एक साथ आते हैं, तो सबसे कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। बस्तर की यह नई तस्वीर पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।











