निशानेबाज न्यूज़ डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान एक नई आर्थिक रणनीति पर काम कर रहा है, जो वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है। खबरों के मुताबिक, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर टोल टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। यह वही अहम समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG की सप्लाई होती है।
हर बैरल पर लग सकता है शुल्क
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान प्रति बैरल तेल पर करीब 1 डॉलर का ट्रांजिट चार्ज लगा सकता है। अगर यह योजना लागू होती है, तो देश को सालाना 70 से 80 बिलियन डॉलर (करीब 6.4 से 7.4 लाख करोड़ रुपये) की आय हो सकती है। यह रकम ईरान की पारंपरिक तेल निर्यात आय से भी अधिक हो सकती है।
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पहले से बढ़ रही है तेल आय
आंकड़ों के अनुसार, ईरान ने 2023 में लगभग 41.1 बिलियन डॉलर और 2024 में 46.7 बिलियन डॉलर की कमाई तेल निर्यात से की थी। वहीं 2026 में उसकी दैनिक आय करीब 139 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। वर्तमान में ईरान करीब 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात कर रहा है।
तनाव का असर वैश्विक बाजार पर
अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच कुछ समय के लिए इस जलमार्ग को बंद करने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे कीमतों में उछाल देखने को मिला। बाद में अस्थायी युद्धविराम के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई।
शिपिंग सेक्टर पर भी असर
तनाव के कारण करीब 187 तेल टैंकर, जिनमें 172 मिलियन बैरल तेल था, रास्ते में फंस गए थे। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में 1000 से ज्यादा जहाजों की भीड़ लग गई थी, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
क्या होगा आगे?
अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान वास्तव में टोल टैक्स लागू करता है। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर भी बड़ा असर डालेगा।











