Vidisha News: उफनती बेतवा नदी पर छलांग लगाकर स्कूल पहुंचने को मजबूर बच्चे, विदिशा में शिक्षा के लिए हर दिन उठाते हैं जान का जोखिम

Anuj Nirala

Vidisha News: विदिशा। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के सरकारी दावों के बीच मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बुनियादी व्यवस्था की पोल खोल रही है। जिले के ककरुआ गांव के स्कूली बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में उफनती बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे मोहरों पर छलांग लगाते हुए बच्चे हाई स्कूल तक पहुंचते हैं। जरा-सी चूक उन्हें तेज बहाव में बहा सकती है, लेकिन पढ़ाई की मजबूरी उन्हें हर दिन इस खतरनाक सफर के लिए विवश कर देती है।

आठवीं के बाद शुरू होती है जोखिम भरी पढ़ाई की राह

ग्रामीणों के मुताबिक ककरुआ गांव में केवल आठवीं तक स्कूल संचालित है। इसके बाद छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव स्थित हाई स्कूल जाना पड़ता है। स्कूल तक पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम से होकर गुजरता है। बरसात में जब नदी उफान पर होती है, तब भी बच्चों के सामने इसी रास्ते से गुजरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।

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सुरक्षित रास्ता है, लेकिन दूरी बनती है मजबूरी

Vidisha News: हालांकि स्कूल तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक सड़क मार्ग भी है, लेकिन उसकी दूरी करीब 8 से 15 किलोमीटर है। छोटे बच्चों के लिए रोज इतनी लंबी दूरी तय करना संभव नहीं है। यही वजह है कि छात्र जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम के संकरे हिस्से पर चलते और छलांग लगाते हुए स्कूल पहुंचते हैं।

हर दिन मंडराता है बड़े हादसे का खतरा

बारिश के कारण स्टॉप डैम पर लगातार पानी बहता रहता है। फिसलन और तेज बहाव के बीच बच्चों का संतुलन बिगड़ने का खतरा हर पल बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार छोटे बच्चे डर के कारण बीच रास्ते में रुक जाते हैं, लेकिन पढ़ाई छूटने के डर से फिर आगे बढ़ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन हालात बेहद चिंताजनक हैं।

वर्षों से उठ रही मांग, अब तक नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पुल और सड़क निर्माण की मांग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकला। हर बरसात में यही स्थिति बनती है और बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

Vidisha News: ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बेतवा नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए या स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच सकेंगे।

ककरुआ गांव की यह तस्वीर केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की हकीकत भी बयां करती है। सवाल यह है कि क्या बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालना ही पड़ेगा, या फिर प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए समय रहते ठोस कदम उठाएगा?

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