नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम के सम्मान को लेकर हुई चर्चा ने संकेत दिए कि केंद्र सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है। इसी क्रम में इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें राष्ट्रगान और वंदे मातरम के गानों के लिए लागू प्रोटोकॉल और उनके सम्मान को बढ़ाने पर विचार किया गया।
वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के समय प्रेरणादायक गीत के रूप में उभरा। संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रगान की तरह इसके गाने या सुनाने के लिए कोई अनिवार्य शिष्टाचार या कानूनी आवश्यकता नहीं है।
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सरकार की योजना और उत्सव
केंद्र सरकार इस साल वंदे मातरम का सालभर चलने वाला उत्सव शुरू कर रही है। पहला चरण नवंबर में पूरा हो चुका है, दूसरा चरण इसी महीने, तीसरा अगस्त 2026 और चौथा नवंबर 2026 में आयोजित किया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने यह परखा कि क्या वंदे मातरम गाने की परिस्थितियों को स्पष्ट करने और अनादर के मामलों में दंड का प्रावधान करना चाहिए।
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत में अंतर
राष्ट्रगान जन गण मन संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 51ए(ए) के तहत नागरिकों का इसे सम्मान करना मौलिक कर्तव्य है। वहीं, वंदे मातरम को इस तरह की कानूनी सुरक्षा नहीं मिली है, जिससे इसके सम्मान के लिए अलग नियमों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस
वंदे मातरम राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस का विषय भी बना हुआ है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने कुछ छंद हटाए, जबकि कांग्रेस आरोप लगाती है कि भाजपा चुनावी रणनीति के तहत इतिहास तोड़-मरोड़ कर रही है।
केंद्र सरकार के इस कदम से वंदे मातरम के सम्मान और प्रतिष्ठा को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में इसके सत्कार और आयोजन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बन सकते हैं।













