निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त के पावन समय पर भव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।
देश-विदेश से उमड़ी आस्था
इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। भगवान महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर नजर आए और पूरे वातावरण में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला।
पंचामृत अभिषेक से हुआ शुभारंभ
भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत स्नान कराया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और शंखध्वनि ने मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
भस्म श्रृंगार का गूढ़ महत्व
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया, जो इस आरती की प्रमुख परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक है, जो भक्तों को सांसारिक मोह से दूर होकर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
भक्ति और साधना का संगम
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में मंत्र-जप, भजन और ध्यान का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु शांत मन से आरती के दर्शन करते हुए भक्ति में लीन नजर आए। मान्यता है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
वैश्विक आस्था का केंद्र बना उज्जैन
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उज्जैन आज विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चेतना और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।











