Gender options uproar : जयपुर। जयपुर से जोधपुर जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में बुधवार दोपहर (11 दिसंबर 2025) उस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब एक ट्रांसजेंडर वकील रवीना सिंह ने बस कंडक्टर द्वारा उन्हें ‘महिला कैटेगरी’ में टिकट दिए जाने का कड़ा विरोध किया। रवीना सिंह का कहना था कि जब उनका अपना जेंडर है, तो उन्हें पुरुष या महिला के रूप में वर्गीकृत कर टिकट क्यों जारी किया जा रहा है। टिकट मशीन में ‘ट्रांसजेंडर’ विकल्प की कमी इस पूरे विवाद का मूल कारण बनी।
Gender options uproar : कंडक्टर ने जताई मजबूरी, रवीना ने किया विरोध
यह घटना जयपुर के दूदू क्षेत्र में हुई। रवीना सिंह जयपुर से जोधपुर की यात्रा कर रही थीं। उन्होंने बस में कंडक्टर को 500 रुपये दिए। कंडक्टर ने स्पष्ट किया कि उसकी टिकट मशीन में केवल ‘पुरुष’ और ‘महिला’ के ही विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए वह मजबूरीवश उन्हें महिला कैटेगरी का टिकट जारी कर रहा है। कंडक्टर की इस बात पर रवीना नाराज हो गईं और उन्होंने विरोध करते हुए बहस शुरू कर दी। रवीना सिंह का दावा है कि वह राजस्थान हाईकोर्ट की पहली ट्रांसजेंडर वकील हैं।
Gender options uproar : विवाद बढ़ने पर बस थाने ले जाई गई
जब विवाद काफी बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच सुलह नहीं हो पाई, तो कंडक्टर ने यात्रियों सहित पूरी बस को दूदू पुलिस थाने ले जाना पड़ा। थाने में पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को सुना। दूदू थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने बाद में बताया कि यह विवाद टिकट में जेंडर विकल्प की कमी को लेकर हुई ‘गलतफहमी’ के कारण बढ़ा था। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया, जिसके बाद बस को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।
Gender options uproar : राजस्थान हाईकोर्ट की पहली ट्रांसजेंडर वकील
रवीना सिंह मूल रूप से पाली जिले के सोजत की रहने वाली हैं। जेंडर परिवर्तन से पहले उनका नाम रविंद्र सिंह था। उन्होंने बीकानेर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2 अगस्त 2025 को राजस्थान बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उनका दावा है कि वह राजस्थान हाईकोर्ट की पहली ट्रांसजेंडर वकील हैं। यह घटना सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग और सम्मानजनक पहचान विकल्प की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।











