कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में बुधवार को बड़ा राजनीतिक भूचाल आया, जब तृणमूल कांग्रेस ने अपने विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। हाल ही में उन्होंने बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद से वे लगातार रडार पर थे। पार्टी कई बार सार्वजनिक रूप से उनके बयानों से दूरी बना चुकी थी, लेकिन कबीर अपने रुख पर अड़े रहे। इसी कारण TMC ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया।
विशेष बात यह रही कि जब उनका निलंबन हुआ, उस वक्त हुमायूं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बैठक में मौजूद थे। उसी समय कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके निलंबन की घोषणा की गई।
‘कल TMC से इस्तीफा दूंगा’, MLA के बदले तेवर
सस्पेंशन के तुरंत बाद हुमायूं कबीर ने कहा,“मैं कल TMC से इस्तीफा दे दूंगा। जरूरत पड़ी तो 22 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान करूँगा।”उनके तेवर स्पष्ट संकेत देते हैं कि वे अब टीएमसी के खिलाफ ही मुकाबले की तैयारी में हैं। इससे पहले वे कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों में रह चुके हैं।
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135 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा
जानकारी दें कि, कबीर ने पहले ही घोषणा की थी कि वे 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की रूपरेखा घोषित करेंगे। दावा किया था कि—वे खुद रेंजी नगर से चुनाव लड़ेंगे,और उनकी पार्टी 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी।उन्होंने कहा था, “जनता ही बताएगी कि नई पार्टी का भविष्य क्या होगा।”
बाबरी मस्जिद का शिलान्यास—तनाव का असली कारण
दरअसल यह विवाद तब बढ़ा जब विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखने की घोषणा कर दी।सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार से सवाल किया कि—“अगर बयान से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है, तो उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही?”
हुमायूं के इस बयान के बाद इलाके में तनाव बढ़ने लगा था। उन्होंने कहा था कि लाखों लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे और कोई इसे रोक नहीं सकता।
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TMC ने बयान को बताया संवेदनशील और खतरनाक
टीएमसी नेताओं ने कहा है कि हुमायूं कबीर के बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ सकता था, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। पार्टी ने साफ किया कि उनका वक्तव्य TMC की नीति के बिल्कुल खिलाफ था। इसी कारण उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया।











