Tikamgarh News:जमील खान\ टीकमगढ़। मोहर्रम के 40वें दिन मनाए जाने वाले चेहल्लुम के अवसर पर बुधवार को टीकमगढ़ शहर में गम, अकीदत और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। कर्बला की जंग में शहीद हुए हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की याद में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से भव्य ताजिया और मातमी जुलूस निकाले गए। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए, जबकि शहरवासियों ने भी जगह-जगह ताजियों का स्वागत कर उन्हें श्रद्धापूर्वक निहारा।
चेहल्लुम के अवसर पर शहर के अलग-अलग मोहल्लों से आकर्षक और कलात्मक ताजिए निकाले गए। रंग-बिरंगी सजावट, पारंपरिक शैली और बारीक नक्काशी से सजे ताजियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ताजिया तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कलात्मक कौशल की लोगों ने जमकर सराहना की।
मानस मंच पर हुआ ताजियों का दीदार
Tikamgarh News: शाम के समय शहर के सभी ताजिए मानस मंच मैदान में एकत्रित हुए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और शहरवासियों ने ताजियों के दीदार किए। लोगों ने श्रद्धा के साथ ताजियों पर प्रसाद और नजराना अर्पित किया तथा कर्बला के शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरा परिसर धार्मिक माहौल और अकीदत से सराबोर नजर आया।
मातमी जुलूस में उमड़ी बड़ी संख्या में भीड़
रात्रि के समय ताजिया जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ा। जुलूस में शामिल अकीदतमंद मातम करते हुए हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर रहे थे। शहर के विभिन्न मार्गों पर लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और शांति एवं भाईचारे का संदेश दिया।
महेंद्र सागर तालाब स्थित कर्बला में हुआ ताजियों का सुपुर्द-ए-खाक
Tikamgarh News: देर रात ताजिया जुलूस महेंद्र सागर तालाब स्थित कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजियों को ठंडा (सुपुर्द-ए-खाक) किया गया। इस धार्मिक रस्म के साथ चेहल्लुम का आयोजन संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने अमन, भाईचारे और इंसानियत की दुआ मांगी।
प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
चेहल्लुम के अवसर पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखा गया। प्रशासन की सतर्कता और लोगों के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।चेहल्लुम के इस आयोजन ने एक बार फिर टीकमगढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश की।




