Say Cabinet Meeting : रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि यह बैठक राज्य में सरकार के प्रमुख एजेंडों को आगे बढ़ाने की दिशा में कई अहम मुद्दों पर मुहर लगा सकती है। नई सरकार के गठन के बाद यह बैठक शीतकालीन सत्र की तैयारियों और किसानों से जुड़े चुनावी वादों को पूरा करने की रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Say Cabinet Meeting : बैठक का मुख्य फोकस आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए विधेयकों को अंतिम रूप देना है। सरकार सत्र में पेश किए जाने वाले विधायी कार्यों पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान कर सकती है। इन विधेयकों में सबसे अधिक चर्चा धर्मांतरण से संबंधित कानून के संशोधन को लेकर है, जिस पर मुहर लगने की प्रबल संभावना है। यह संशोधन कानून राज्य में धर्मांतरण के मामलों को लेकर सरकार की सख्त नीति को दर्शाता है।
Say Cabinet Meeting : एजेंडे में दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण विषय किसानों की समस्या और धान खरीदी से जुड़ा है। मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में वर्तमान धान खरीदी की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने और चुनावी घोषणा पत्र के तहत किए गए वादों को पूरा करने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हो सकती है। किसानों के हित से जुड़े इस फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
Say Cabinet Meeting : सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में राज्य के अन्य विकास कार्यों, प्रशासनिक फेरबदल और नई योजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार जल्द से जल्द अपनी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से फैसले ले रही है, और यह बैठक इसी दिशा में एक कदम है। बैठक में लिए जाने वाले फैसले राज्य की नीति और दिशा को स्पष्ट करेंगे।
Say Cabinet Meeting : यह बैठक मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में शुरू हुई है और वरिष्ठ मंत्रियों सहित सभी कैबिनेट सदस्यों की उपस्थिति है। बैठक में लिए जाने वाले निर्णय जल्द ही आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किए जाएंगे। इस दौरान, सरकार विभिन्न विभागों के प्रस्तावों की समीक्षा कर जनता के हितों को प्राथमिकता देने वाले फैसलों पर केंद्रित रहेगी।
संक्षेप में, यह कैबिनेट बैठक विष्णुदेव साय सरकार के कार्यकाल की दिशा तय करने, विधायी कार्यों को गति देने और किसानों से जुड़े बड़े वादों को पूरा करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।













