System indifference : टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पीड़ित युवक न्याय की उम्मीद खोकर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर निर्वस्त्र होकर चढ़ गया। युवक अपने साथ प्लास्टिक की रस्सी लेकर आया था और कलेक्ट्रेट परिसर में ही फांसी लगाकर जान देने की कोशिश करने लगा। इस दौरान वहां तैनात पुलिस जवानों और युवक के बीच काफी जद्दोजहद हुई, जिसके बाद युवक रस्सी सहित जमीन पर आ गिरा। इस पूरी घटना के दौरान युवक का परिवार हाथों में ज्ञापन लिए वहां मौजूद था और रो-रोकर अपना दुखड़ा सुना रहा था।
System indifference : 2015 से राशन को तरस रहा परिवार घटना मोहनगढ़ तहसील के ग्राम पंचमपुरा की है। पीड़ित जितेंद्र प्रजापति और उसके पिता घंशू प्रजापति का आरोप है कि उनका परिवार गरीबी रेखा (BPL) के अंतर्गत आता है, लेकिन 2015 से उन्हें सरकारी कंट्रोल की दुकान से राशन नहीं दिया जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, राशन दुकानदार न केवल राशन देने से मना करता है, बल्कि उन्हें यह कहकर धमकाता भी है कि ‘जाओ जिससे शिकायत करनी हो कर लो, राशन नहीं मिलेगा।’
System indifference : तहसील से भोपाल तक लगाई गुहार, पर मिली सिर्फ बेरुखी पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने राशन के अधिकार के लिए मोहनगढ़ तहसील से लेकर जिला खाद्य विभाग और यहां तक कि भोपाल में भी कई बार लिखित शिकायतें कीं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर आज परिवार कलेक्टर से मिलने पहुंचा था, लेकिन जब वहां भी कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो हताशा में युवक ने आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया। मौके पर पहुंची पुलिस युवक और उसके परिवार को थाने ले गई, जहां उन्हें समझाइश देकर घर वापस भेजा गया।
System indifference : प्रशासन का संवेदनहीन बयान: घटना को बताया ‘ड्रामा’ इस पूरे मामले में प्रशासन का रवैया हैरान करने वाला रहा। टीकमगढ़ के अपर कलेक्टर शिवप्रसाद मंडराह ने घटना पर संवेदनशीलता दिखाने के बजाय इसे ‘ड्रामा’ करार दिया। उनका तर्क है कि पीड़ित परिवार खुद राशन दुकान पर नहीं जाता है। प्रशासन के इस बयान ने पीड़ित परिवार के उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है जिसमें उन्होंने सालों से अधिकारियों के चक्कर काटने की बात कही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या राशन के अधिकार के लिए एक गरीब परिवार को जान की बाजी लगानी पड़ेगी?









