Lailunga Human Interest Story: गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा (रायगढ़): छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील से एक बेहद संवेदनशील और मानवीय सरोकार से जुड़ा मामला सामने आया है। पति की असामयिक मृत्यु के बाद गहरे आर्थिक संकट और भरण-पोषण की समस्या से जूझ रही एक ग्रामीण विधवा महिला ने अपने दिवंगत पति के स्थान पर कोटवार पद पर नियुक्ति के लिए तहसीलदार लैलूंगा को आवेदन सौंपा है। महिला ने शासन-प्रशासन की मानवीय संवेदनाओं और अनुकंपा के सिद्धांतों का हवाला देते हुए अपने परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देने की मांग की है।

आनंद राम चौहान के निधन के बाद से रिक्त है रूपडेगा में कोटवार का पद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लैलूंगा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रूपडेगा की निवासी निमावती चौहान ने तहसीलदार को सौंपे गए अपने आधिकारिक आवेदन में बताया है कि उनके पति आनंद राम चौहान लंबे समय से ग्राम में कोटवार के पद पर पूरी निष्ठा से कार्यरत थे।
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असामयिक निधन: बीते वर्ष 18 दिसंबर 2025 को आनंद राम चौहान का आकस्मिक निधन हो गया।
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आजीविका का संकट: पति के निधन के बाद से ही गांव में कोटवार का यह महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहा है। इस दुखद घटना के बाद से निमावती चौहान के परिवार के सामने आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं बचा है, जिससे उनके और बच्चों के सामने भरण-पोषण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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प्रशासनिक दस्तावेज संलग्न: महिला ने अपनी योग्यता और पात्रता साबित करने के लिए आवेदन के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार प्रमाण पत्र, कक्षा 5वीं की अंकसूची और आधार कार्ड जैसे सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज भी संलग्न किए हैं।
सरपंच की अगुवाई में तहसील कार्यालय पहुंचे ग्रामीण; बुजुर्ग दावेदार का विरोध
इस संवेदनशील मामले में नया मोड़ तब आया जब ग्राम पंचायत रूपडेगा की सरपंच शकुंतला भगत की अगुवाई में बड़ी संख्या में ग्रामवासी विधवा महिला को न्याय दिलाने और उसके समर्थन में सीधे तहसील कार्यालय पहुंच गए।
ग्रामीणों का पक्ष: ग्रामीणों ने तहसीलदार को बताया कि इसी पद के लिए आनंद राम के परिवार से ही एक अन्य उम्रदराज बुजुर्ग ने भी आवेदन किया है। हालांकि, इस पर ग्रामवासियों की सहमति नहीं है। ग्रामीणों का तर्क है कि बुजुर्ग की उम्र बहुत ज्यादा है, जबकि दिवंगत कोटवार की पत्नी निमावती चौहान की उम्र लगभग 40 वर्ष है। यदि निमावती को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो एक तरफ जहां पीड़ित परिवार को मजबूत आर्थिक संबल (Financial Support) मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गांव को भी लंबे समय तक एक सक्रिय कोटवार की नियमित सेवाएं मिलती रहेंगी।
ग्रामीणों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि लंबे समय तक कोटवार का पद रिक्त रहने से स्थानीय राजस्व (Revenue) और प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन पर विपरीत असर पड़ रहा है।
तहसीलदार से मिला आश्वासन, क्षेत्र में चर्चा का विषय
तहसील कार्यालय पहुंचे सरपंच और ग्रामीणों की पूरी बात सुनने के बाद तहसीलदार लैलूंगा ने मामले की संवेदनशीलता को समझा और उचित वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन की ओर से आश्वस्त किया गया है कि नियमों के दायरे में रहते हुए इस मानवीय आवेदन पर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
वर्तमान में यह पूरा मामला लैलूंगा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय प्रबुद्ध जन और ग्रामीण, शासन और जिला प्रशासन से इस बेसहारा परिवार के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हुए शीघ्र एवं अनुकूल निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।







