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Singrauli News : RTI से उजागर हुआ क्रेशर व खनिज विभाग की कार्यशैली का सच, गोलमोल जवाबों से टाल रहे जिम्मेदार अधिकारी…

Singrauli News :सिंगरौली : सिंगरौली जिले के माड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सेमरिया समेत विभिन्न इलाकों में संचालित क्रेशर यूनिटों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने तरीके से खनन एवं परिवहन कार्य किए जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि किस प्रकार प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं।

Singrauli News :RTI में मांगी गई थी ये अहम जानकारियां…

सूचना अधिकार के तहत वर्ष जुलाई 2023 से जून 2025 तक की अवधि में निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी एवं प्रमाणित प्रति मांगी गई थी…

1. माड़ा तहसील के ग्राम सेमरिया में स्थित पत्थर खदान/क्रेशर के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, स्वीकृति पत्र, पर्यावरणीय अनुमति और लाइसेंस की प्रतियां।

2. खनिज विभाग द्वारा अवैध कोयला या खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड।

3. वाहन नंबरवार जुर्माने की राशि, कार्रवाई की तिथि और कारण सहित विवरण।

4. विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट, FIR या चालान की कॉपी।

 

Singrauli News :जवाब आया गोलमोल, सूचना अधूरी…

Singrauli News :आश्चर्यजनक रूप से खनिज विभाग, राजस्व विभाग और परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने RTI आवेदन का जवाब अधूरा और गोलमोल तरीके से दिया। मांगी गई अधिकतर सूचनाएं “रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं” या “यह जानकारी गोपनीय है” जैसे बहानों के साथ टाल दी गईं। इससे न केवल यह स्पष्ट होता है कि संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितने लापरवाह हैं, बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

Singrauli News :स्थानीय लोगों में आक्रोश, उठी कार्रवाई की मांग

Singrauli News :स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “पत्थर खदानों और क्रेशर यूनिटों के कारण पर्यावरण का भारी नुकसान हो रहा है। धूल, ध्वनि प्रदूषण और भारी वाहनों की आवाजाही से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। और जब जानकारी मांगी जाती है, तो अधिकारी जवाब देने से बचते हैं।”

Singrauli News :क्या छुपा रही है खनिज विभाग की चुप्पी?

Singrauli News :विभाग द्वारा रिकॉर्ड साझा न करना या टालमटोल करना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं कागजों में हेराफेरी, अवैध उगाही या बिना अनुमति के खनन जैसी गंभीर गतिविधियों पर पर्दा डाला जा रहा है।

Singrauli News :विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं है, तो यह उनके कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। वहीं यदि जानकारी होते हुए भी नहीं दी जा रही, तो यह सूचना का अधिकार अधिनियम की सीधी अवहेलना है। इस पूरे मामले में प्रदेश के खनिज मंत्री और लोकायुक्त से स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठ रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर किन दबावों में आकर प्रशासन ने सूचना को दबाया साथ ही स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा है कि वे विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर सच्चाई को सामने लाने में भूमिका निभाएं। यह मामला केवल एक RTI के जवाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है। यदि समय रहते इस पर कार्यवाही नहीं की गई, तो यह जिला भविष्य में और भी बड़े पर्यावरणीय एवं सामाजिक संकट की ओर बढ़ सकता है।

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