रीवा, मध्य प्रदेश। गौसेवा के नाम पर मिलने वाले भारी भरकम फंड में भ्रष्टाचार की परतें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। रीवा जनपद की ग्राम पंचायत टीकर की क्रमांक 1 व 2 गौशालाओं में अव्यवस्था और गोवंशों की मौतों का सिलसिला जारी है। यहां भूसे की आपूर्ति से लेकर गोवंशों की देखभाल तक, हर स्तर पर लापरवाही सामने आई है।
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सूत्रों के अनुसार, गौशाला का संचालन करने वाली ग्राम पंचायत एजेंसी ने भूसे की आपूर्ति में भारी भ्रष्टाचार किया है। निराश्रित गोवंशों को न तो पर्याप्त चारा मिल रहा है और न ही सही इलाज और देखरेख। पंचायत सरपंच शंकर लाल गुप्ता का तर्क है कि उनकी गौशाला में क्षमता से अधिक गोवंश हैं, ऐसे में मौतें “स्वाभाविक” हैं।
शंकर लाल गुप्ता, सरपंच, ग्राम पंचायत टीकर – “हमारी गौशाला में संख्या से अधिक गोवंश हैं, ऐसे में उनकी मौतें कैसे रोकी जा सकती हैं?”
हाल ही में रीवा की गदही गौशाला में कुत्तों द्वारा गोवंशों के शव नोचने की भयावह तस्वीरों ने शासन-प्रशासन को हिला कर रख दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों और समूहों को सख्त निर्देश जारी किए थे, लेकिन टीकर में हालात जस के तस बने हुए हैं।
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इस मामले में जनपद सीईओ पूनम दुबे ने कहा कि शासन की नीतियाँ गोवंशों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। टीकर गौशाला में सामने आई अव्यवस्थाओं के मामले में विशेष जांच टीम गठित की गई है जो तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूनम दुबे, जनपद सीईओ, रीवा – “गोवंशों की मौत और भूसे में भ्रष्टाचार के मामले में तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट ली जाएगी, दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा।”













