Ratlam Temple Dispute: ताले में कैद भगवान रतलाम के प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर को मुक्त कराने उठी आवाज, संत समाज पहुंचा कलेक्ट्रेट

Anuj Nirala

Ratlam Temple Dispute: सिकंदर पटेल\ रतलाम। मंदिरों में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान के दरबार में पहुंचते हैं, लेकिन रतलाम में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां भक्तों को भगवान के लिए न्याय की गुहार लगानी पड़ रही है। शहर के रामदेवजी की घाटी स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर वर्षों से बंद पड़ा हुआ है और मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण एवं भगवान शिव की प्राचीन प्रतिमाएं ताले के पीछे कैद हैं। अब संत समाज और सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने मंदिर के ताले खुलवाने तथा प्रतिमाओं को नियमित पूजा-अर्चना के लिए मुक्त कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है।

Ratlam Temple Dispute:बताया जा रहा है कि यह मंदिर शहर की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल रहा है और लंबे समय तक श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा। लेकिन बीते कई वर्षों से मंदिर के द्वार बंद हैं, जिसके कारण न तो यहां नियमित पूजा-पाठ हो पा रहा है और न ही श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिक मास, जन्माष्टमी और अन्य धार्मिक पर्वों पर भी मंदिर सूना रहता है, जबकि अंदर स्थापित प्राचीन प्रतिमाएं संरक्षण और पूजा-अर्चना की प्रतीक्षा कर रही हैं।

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Ratlam Temple Dispute:विवाद का केंद्र केवल मंदिर का बंद होना नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भूमि भी है। सनातन समाज के लोगों का दावा है कि वर्ष 1976 के सरकारी अभिलेखों में यह भूमि श्रीकृष्ण मंदिर के नाम दर्ज थी। आरोप है कि बाद में कथित रूप से दस्तावेजों में हेरफेर कर मंदिर की भूमि को निजी स्वामित्व में परिवर्तित कर दिया गया। लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर कभी मंदिर और उससे जुड़ी धार्मिक गतिविधियां संचालित होती थीं, वहां अब अन्य निर्माण और प्लॉटिंग की स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामला जांच का विषय बना हुआ है।

Ratlam Temple Dispute:जानकार बताते हैं कि वर्षों पहले मंदिर परिसर की देखरेख पुजारी बालमुकुंद बैरागी द्वारा की जाती थी और यहां नियमित धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते थे। समय के साथ मंदिर बंद हो गया और अब इसकी स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह वास्तव में मंदिर की भूमि है, तो इसकी सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है।

Ratlam Temple Dispute:इसी मुद्दे को लेकर बगलामुखी शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर Swami Krishnanand के सान्निध्य में बड़ी संख्या में संत, धर्माचार्य और सनातन धर्म के अनुयायी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मंदिर के ताले खुलवाने, प्राचीन प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नियमित पूजा-अर्चना शुरू कराने और मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की। साथ ही मंदिर की भूमि से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई।

Ratlam Temple Dispute:संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल एक मंदिर का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का विषय है।

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Ratlam Temple Dispute:वहीं वर्तमान भूमि स्वामियों प्रेमलता कटारिया, नरेंद्र कुमार कटारिया और सुनील कटारिया का कहना है कि भूमि से जुड़े सभी दस्तावेज संबंधित राजस्व विभाग और तहसील कार्यालय में उपलब्ध हैं। उनका पक्ष है कि स्वामित्व और भूमि संबंधी स्थिति रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट की जा सकती है।

Ratlam Temple Dispute:फिलहाल यह मामला धार्मिक आस्था, मंदिर संपत्ति और प्रशासनिक जांच के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, मंदिर की भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम है और क्या वर्षों से बंद पड़े इस प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर के द्वार एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खुल पाएंगे।

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