Tanning Beauty Trend: नई दिल्ली: भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग गोरा दिखने की चाहत रखते हैं। फेयरनेस क्रीम से लेकर महंगे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट तक, लोग रंग निखारने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। इसके विपरीत, दुनिया के कुछ देशों में तस्वीर बिल्कुल उलटी नजर आ रही है। वहाँ लोग अपनी गोरी त्वचा को और ज्यादा सांवला या टैन दिखाने के लिए मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में टैनिंग अब सिर्फ एक ब्यूटी ट्रेंड नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा कारोबार बन चुका है।![]()
अमीरी और फिटनेस की निशानी
गर्मियां आते ही लोग धूप में घंटों समय बिताते हैं या फिर टैनिंग सैलून जाकर अलग-अलग कॉस्मेटिक तरीकों का सहारा लेते हैं। दरअसल, वहाँ सांवली या टैन स्किन को बेहद आकर्षक और अच्छी फिटनेस से जोड़कर देखा जाता है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इन देशों में सांवला रंग सिर्फ खूबसूरती का ही नहीं, बल्कि अमीरी और एक्टिव लाइफस्टाइल को दिखाने का एक जरिया बन चुका है। हल्का टैन लुक चेहरे और शरीर को ज्यादा ग्लोइंग बनाता है, जिसके कारण टैनिंग सैलून सालभर व्यस्त रहते हैं।
लाखों का टैनिंग कारोबार
इस बढ़ते क्रेज की वजह से टैनिंग का कारोबार लगातार आसमान छू रहा है। वहाँ लोग एक सिंगल टैनिंग सेशन के लिए 4 हजार से लेकर 17 हजार रुपये तक आसानी से खर्च कर देते हैं। इसके अलावा जो नियमित ग्राहक हैं, वे सालभर में लाखों रुपये बहा देते हैं ताकि उनकी त्वचा का सांवला लुक हमेशा बना रहे। हॉलीवुड और वैश्विक फैशन इंडस्ट्री ने इस ब्रॉन्ज ग्लो को एक प्रीमियम फैशन बना दिया है। किम कार्दशियन और जेनिफर लोपेज जैसी बड़ी सेलिब्रिटीज आज इस लुक के लिए ग्लोबल आइकॉन बन चुकी हैं।
स्किन कैंसर का गंभीर खतरा
हालाँकि, इस नए ट्रेंड को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट्स लगातार गंभीर चेतावनी भी दे रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जरूरत से ज्यादा टैनिंग करना इंसानी त्वचा को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है। परिणामस्वरूप, लंबे समय में स्किन कैंसर जैसी बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। इसके बावजूद सोशल मीडिया के दौर में टैनिंग का क्रेज बिल्कुल कम होता नजर नहीं आ रहा है। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर टैन स्किन को बढ़ावा देने वाली लाखों पोस्ट मौजूद हैं।
सोच का बड़ा अंतर
एक तरफ भारत में जहाँ गोरे रंग को सामाजिक स्वीकृति और बेहतर अवसरों से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देशों में सांवली त्वचा को तरजीह मिल रही है। यह अंतर साफ तौर पर दर्शाता है कि खूबसूरती का कोई एक तय पैमाना नहीं होता है। हर समाज और संस्कृति में इसके मायने पूरी तरह अलग-अलग हो सकते हैं। अंततः, बदलते समय के साथ वैश्विक स्तर पर लोगों की पसंद और फैशन के पैमाने भी लगातार बदल रहे हैं।









