Tuesday, September 1, 2026
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Raipur News: निर्माण सामग्री की महंगाई से ठप पड़ने लगे भवन निर्माण कार्य, ठेकेदार बोले- बिना राहत पूरा करना मुश्किल, सरकार से मांगी राहत

Raipur News
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Raipur News: रायपुर : Chhattisgarh में भवन निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार इन दिनों भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी के कारण कई प्रोजेक्ट पूरे करना मुश्किल हो गया है। खासकर वे भवन निर्माण कार्य, जो अंतिम चरण में हैं, अब ठेकेदारों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

Raipur News: ठेकेदारों का कहना है कि जिन अनुबंधों में मूल्य वृद्धि (प्राइस एस्केलेशन) का फार्मूला लागू है, उनमें भी केवल 5 प्रतिशत तक ही राहत मिल रही है। वहीं जिन अनुबंधों में यह व्यवस्था नहीं है, वहां किसी तरह की राहत नहीं मिल पा रही है। ऐसे में बढ़ती लागत का पूरा बोझ ठेकेदारों पर आ गया है।

Raipur News: निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण निर्माण सामग्री की कीमतों में भारी उछाल आया है। सबसे ज्यादा असर विद्युतीकरण कार्यों पर पड़ा है। इलेक्ट्रिकल सामग्री की कीमतें लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं वाटर सप्लाई से जुड़े सामानों की दरों में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा एल्यूमीनियम और फ्लोरिंग सामग्री की कीमतों में भी 30 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

Raipur News: ठेकेदारों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी भवन का अनुबंध 10 करोड़ रुपए में हुआ है, तो उसमें फ्लोरिंग, एल्यूमीनियम, विद्युतीकरण और वाटर सप्लाई जैसे कार्यों की हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 प्रतिशत होती है। अब इन कार्यों की लागत में 80 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका सीधा असर पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ा है और कुल निर्माण लागत करीब 15 से 18 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

Raipur News: निर्माण एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने अनुबंध दरों पर काम पूरा करना लगभग असंभव हो गया है। कई ठेकेदार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Raipur News: भवन निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों ने राज्य सरकार से मांग की है कि उन्हें भी विशेष राहत पैकेज या अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाए, ताकि रुके हुए और अंतिम चरण के निर्माण कार्य पूरे किए जा सकें। ठेकेदारों का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो कई परियोजनाएं अधूरी रह सकती हैं, जिसका असर सरकारी विकास कार्यों पर भी पड़ेगा।

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