रायपुर : खरीफ सीजन 2025-26 में रायपुर जिला प्रशासन ने अवैध धान परिवहन और भंडारण के खिलाफ कड़ा अभियान चलाकर 42 मामलों में 1537.60 क्विंटल धान जब्त किया है। हालांकि इस बड़े ऑपरेशन ने धान खरीदी सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। किसानों के अनुसार खरीदी व्यवस्थाओं में देरी, अपर्याप्त निगरानी और स्टॉक वेरिफिकेशन की कमी की वजह से ही अवैध धान कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
13 नवंबर से 1 दिसंबर तक छापेमारी—फिर भी सामने आई सिस्टम की कमजोरी
खाद्य विभाग, राजस्व विभाग और मंडी समिति की संयुक्त टीमों ने कलेक्टर के निर्देश पर 13 नवंबर से जिलेभर में छापे मारे। लेकिन सवाल उठ रहा है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर अवैध धान मिल रहा है, तो खरीदी सीजन शुरू होते समय पहले ही प्रभावी मॉनिटरिंग क्यों नहीं की गई?कई किसानों ने आरोप लगाया कि खरीदी प्रक्रिया में लापरवाही और बारदाना की कमी के कारण बिचौलियों को मौका मिलता है और अवैध स्टॉकिंग बढ़ती है।
कुर्रा में पराग ट्रेडर्स से 508 क्विंटल धान—सिस्टम की बड़ी चूक
अभियान के दौरान सबसे बड़ा खुलासा कुर्रा क्षेत्र में हुआ, जहां पराग ट्रेडर्स राइस मिल से 508 क्विंटल अवैध धान मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान लंबे समय से स्टोर था, लेकिन किसी अधिकारी ने इसकी समय रहते जांच नहीं की।यह मामला साबित करता है कि मंडी एक्ट की धारा 19 लागू होने के बावजूद निगरानी तंत्र कमजोर है।
विभिन्न मंडी क्षेत्रों में लगातार धान जब्त—पर सवाल यह कि पहले क्यों नहीं रोका गया?
- रायपुर मंडी क्षेत्र: 12 मामले, 472 क्विंटल
- नवापारा मंडी क्षेत्र: 10 मामले, 167.40 क्विंटल
- नेवरा मंडी क्षेत्र: 14 मामले, 298.40 क्विंटल
- आरंग और अभनपुर: लगातार मामले सामने आए
इस मामले में फिलहाल बड़ा तथ्य यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध स्टॉक तब ही संभव है जब खरीदी प्रणाली की शुरुआती जाँच कमजोर हो।
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धान खरीदी रफ्तार में—लेकिन किसानों को व्यवस्था पर भरोसा कम
5 दिसंबर को 2527 किसानों से 1.19 लाख क्विंटल धान खरीदा गया।अब तक 13.77 लाख क्विंटल खरीद हो चुकी है।
लेकिन किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि—
- खरीदी केंद्रों पर भीड़
- बारदाना की कमी
- तौल प्रक्रिया में देरी
- और मिलर्स से मिलीभगत
इन कारणों से अवैध व्यापार बढ़ रहा है।
प्रशासन सक्रिय, पर सुधार की जरूरत स्पष्ट
कलेक्टर ने कहा है कि कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी ही पर्याप्त नहीं है।
प्रणालीगत सुधार जरूरी हैं—
- रियल-टाइम स्टॉक मॉनिटरिंग
- खरीदी केंद्रों पर डिजिटल ट्रैकिंग
- मिलों की सख्त मासिक ऑडिट
- किसानों की शिकायतों का तुरंत समाधान
तभी अवैध धान कारोबार पर स्थायी रोक लग सकेगी।













