PM College of Excellence MP News : मध्य प्रदेश (17 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘एक्सीलेंस’ का दर्जा प्राप्त महाविद्यालयों में छात्र सुविधाओं को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस से आई तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य श्री सिद्दीकी पर तानाशाही और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए कॉलेज परिसर में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत की है।
खतरे में छात्र: लटकते तार और गंदगी का साम्राज्य
छात्रों का आरोप है कि कॉलेज परिसर में साफ-सफाई की स्थिति दयनीय है। कक्षाओं में बिजली के बोर्ड उखड़कर नीचे लटके हुए हैं और नंगे तार खुले पड़े हैं, जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। सबसे बुरी स्थिति शौचालयों की है, जहाँ गंदगी के अंबार के कारण छात्राओं का बैठना मुश्किल हो गया है। आलम यह है कि डिजिटल क्लासरूम धूल फांक रहे हैं और आपातकालीन बिजली के लिए रखा गया डीजी सेट जंग खाकर कबाड़ में तब्दील हो चुका है।
भ्रष्टाचार और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल
कॉलेज की नई बिल्डिंग के निर्माण पर भी भ्रष्टाचार के बादल मंडरा रहे हैं। छात्रों का दावा है कि करोड़ों की लागत से बने नए भवन की छत से पानी टपक रहा है। इसके अलावा, कॉलेज के मुख्य गेट के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है। छात्रों के अनुसार, जिस गेट पर करीब 10 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया है, वह बहुत कम राशि में तैयार हो सकता था। हैरानी की बात यह है कि निगरानी के लिए लगे सीसीटीवी कैमरे भी गायब हैं।
ABVP ने दी तालाबंदी की चेतावनी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इन समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। परिषद ने गर्ल्स टॉयलेट में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाने, नई बिल्डिंग की बाउंड्री वॉल बनवाने, शुद्ध पेयजल, कैंटीन संचालन और पुस्तकालय में नई किताबों की मांग रखी है। छात्र संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुधार नहीं हुआ, तो कॉलेज में तालाबंदी कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सवालों से बचते नजर आए प्राचार्य
जब मीडिया कर्मियों ने इन आरोपों पर प्राचार्य सिद्दीकी का पक्ष जानने की कोशिश की, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। प्राचार्य ने पत्रकारों को घंटों अपने चैंबर के बाहर इंतजार कराया और बाद में बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। प्राचार्य के इस व्यवहार से छात्रों और संगठन में आक्रोश और बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि उच्च शिक्षा विभाग इस ‘एक्सीलेंस’ कॉलेज की गिरती छवि को बचाने के लिए क्या कदम उठाता है।













