Oath Judge : नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को छह नए न्यायाधीशों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय द्वारा दिलाई गई। इस नियुक्ति के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 40 हो गई है। हालांकि कोर्ट में स्वीकृत पदों की संख्या 60 है, यानी अब भी 20 पद रिक्त हैं।
यह नियुक्तियाँ सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की अनुशंसा पर केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद की गई हैं। इन न्यायाधीशों का स्थानांतरण देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से दिल्ली हाई कोर्ट में किया गया है। माना जा रहा है कि इससे न्याय वितरण प्रणाली को गति मिलेगी और दिल्ली हाई कोर्ट में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के निपटारे में तेज़ी आएगी।
नए न्यायाधीशों की संक्षिप्त पृष्ठभूमि:
1. न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव
पूर्व में दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत रहे न्यायमूर्ति राव का मई 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट में स्थानांतरण हुआ था। अब वे पुनः अपने मूल कोर्ट में लौटे हैं। उन्हें 2013 में अतिरिक्त न्यायाधीश और 2015 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
2. न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे
बॉम्बे हाई कोर्ट से आए न्यायमूर्ति साम्ब्रे ने 1992 में नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की थी। उन्होंने उसी वर्ष वकालत शुरू की और 2014 में बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने।
3. न्यायमूर्ति विवेक चौधरी
इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्थानांतरित हुए न्यायमूर्ति चौधरी ने 1988 में मेरठ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। उन्हें 2017 में अतिरिक्त और 2018 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।
4. न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से आए न्यायमूर्ति क्षेत्रपाल ने 1988 में वकालत शुरू की। वे 2014 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने और 2017 में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए।
5. न्यायमूर्ति अरुण मोंगा
राजस्थान हाई कोर्ट से स्थानांतरित होकर आए न्यायमूर्ति मोंगा ने पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की। 1991 में वकालत शुरू की और 2018 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुए। बाद में उनका स्थानांतरण राजस्थान हाई कोर्ट में हुआ।
6. न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला
इलाहाबाद हाई कोर्ट से आए न्यायमूर्ति शुक्ला ने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 2003 में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में नामांकन कराया। वे अगस्त 2022 में अतिरिक्त और मार्च 2024 में स्थायी न्यायाधीश बनाए गए।
सार्थक परिणामों की उम्मीद:
इन छह न्यायाधीशों की नियुक्ति से दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल लंबित मामलों के निपटारे में तेज़ी आएगी बल्कि आम जनता को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी अधिक समयबद्ध और प्रभावी होगी।











