Singrauli Sand Mining Probe: सिंगरौली। मध्य प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सिंगरौली जिले में कथित अवैध रेत खनन का मामला अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। जिले की प्रमुख नदियों सोन, रिहंद, महान और गोपद में निर्धारित मानकों से परे भारी मशीनों के जरिए रेत उत्खनन किए जाने के आरोपों के बाद राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SIA) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Singrauli Sand Mining Probe: शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि देवसर तहसील क्षेत्र की विभिन्न रेत खदानों में संचालित खनन गतिविधियों के दौरान निर्धारित सीमा से बाहर जाकर मशीनों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है। आरोपों के समर्थन में जीपीएस टैग्ड फोटोग्राफ, वीडियो फुटेज और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट भी संबंधित एजेंसियों को प्रस्तुत की गई हैं।
पर्यावरणीय दिशानिर्देशों के उल्लंघन के आरोप
Singrauli Sand Mining Probe: शिकायत में दावा किया गया है कि खनन कार्य सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस-2016 और एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस-2020 के प्रावधानों के विपरीत संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन किया गया, जिससे नदियों के प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
SIA और NGT ने गठित की जांच समितियां
Singrauli Sand Mining Probe: मामले की गंभीरता को देखते हुए SIA के सचिव सुधीर कुमार कोचर द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। वहीं, NGT की केंद्रीय पीठ ने भी संयुक्त जांच दल गठित कर छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
Singrauli Sand Mining Probe: जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि संबंधित खनन गतिविधियां पर्यावरणीय स्वीकृतियों, खनन पट्टे की शर्तों और वैधानिक नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही थीं या नहीं।
वन विभाग की रिपोर्ट में भी अनियमितताओं के संकेत
Singrauli Sand Mining Probe: सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में भी कई गंभीर बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्रों में वन स्वीकृति (Forest NOC) की स्थिति स्पष्ट न होने और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों में कमी का उल्लेख किया गया है।
Singrauli Sand Mining Probe: साथ ही यह भी आरोप है कि खनन स्थलों पर ऑयल-ग्रीस ट्रैप और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं थीं, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी मानी जाती हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
Singrauli Sand Mining Probe: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और NGT के संज्ञान के बाद जिला प्रशासन द्वारा रिहंद जलाशय क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई कर लगभग 155 घन मीटर रेत जब्त किए जाने का दावा किया गया था।
Singrauli Sand Mining Probe: हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि जब्त की गई रेत बाद में संबंधित कंपनी को ही सौंप दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवैध खनन से पर्यावरण को गंभीर खतरा
Singrauli Sand Mining Probe: पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदियों में निर्धारित सीमा से अधिक और अनियंत्रित खनन किया जाता है, तो इससे नदी की प्राकृतिक धारा, भू-जल पुनर्भरण क्षमता, जल संरक्षण व्यवस्था और जलीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।
Singrauli Sand Mining Probe: विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसी गतिविधियां जारी रहने से नदी तंत्र असंतुलित हो सकता है और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश
Singrauli Sand Mining Probe: इधर, प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने हाल ही में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सभी जिलों के अधिकारियों को अवैध खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
Singrauli Sand Mining Probe: उन्होंने कहा कि अवैध परिवहन में जब्त वाहनों को राजसात कर शीघ्र नीलाम किया जाए, ताकि खनन माफियाओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों और कंपनी का पक्ष नहीं आया सामने
Singrauli Sand Mining Probe: इस मामले में संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। जिला खनिज अधिकारी तथा संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
यदि भविष्य में उनका पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
Singrauli Sand Mining Probe: लगातार मिल रही शिकायतों, जांच समितियों के गठन और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आरोप सही हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित विभाग स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं।
Singrauli Sand Mining Probe: फिलहाल, SIA, NGT और प्रशासनिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इन्हीं निष्कर्षों से यह स्पष्ट होगा कि सिंगरौली की नदियों में खनन गतिविधियां पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप संचालित हो रही थीं या नहीं।









