Thursday, September 10, 2026
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Supreme Court Hearing Student Protest Case: छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई; हाई पावर्ड कमेटी ने शुरू किया अपना काम

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Supreme Court Hearing Student Protest Case: छात्र प्रदर्शनों से जुड़े गंभीर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि मामले की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। कमेटी की प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया गया कि इसकी अगली महत्वपूर्ण बैठक 15 सितंबर को प्रस्तावित है।

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कमेटी की रिपोर्टिंग के लिए नोडल अधिकारी और एमिकस क्यूरी की मांग

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम COURT से आग्रह किया कि हाई पावर्ड कमेटी के कामकाज की नियमित जानकारी अदालत तक पहुंचाने के लिए किसी एमिकस क्यूरी या नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए। वकीलों का तर्क था कि इससे सुप्रीम कोर्ट को कमेटी की कार्यवाही और दैनिक प्रगति का अपडेट मिलता रहेगा। इसके साथ ही पीड़ित छात्र और मामले से जुड़े वकील भी अपनी बात बिना किसी बाधा के सीधे कमेटी तक पहुंचा सकेंगे।

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प्रशांत भूषण ने कमेटी सदस्य की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, सॉलिसिटर जनरल ने जताया विरोध

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने हाई पावर्ड कमेटी के एक सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा किया, जिस पर सॉलिसिटर GENERAL ने कड़ी आपत्ति जताई। सॉलिसिटर जनरल ने पलटवार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष के हिसाब से चुनिंदा लोगों को छोड़कर बाकी सभी लोग बेईमान हैं। वहीं, बेंच के सदस्य जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने काफी विचार-विमर्श और संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखकर ही इस निष्पक्ष कमेटी का गठन किया है।

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जंतर-मंतर घटना के गवाहों को कमेटी के सामने रखने का निर्देश, ऑनलाइन पोर्टल का सुझाव

सुनवाई के दौरान एक वकील ने जंतर-मंतर की घटना के प्रत्यक्षदर्शी और 14 साल की एक असुरक्षित गवाह को कोर्ट में पेश कर बयान दिलाने का अनुरोध किया। जजों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात हाई पावर्ड कमेटी के समक्ष ही रखनी होगी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोई भी गवाह कमेटी के सेक्रेट्री के जरिए संपर्क कर सकता है। वहीं, वरिष्ठ वकील हरिहरन ने सुझाव दिया कि यदि कमेटी जानकारी जुटाने के लिए एक डिजिटल पोर्टल बना दे, तो गवाहों और छात्रों के लिए अपनी बात पहुंचाना अधिक सुगम होगा।

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