Khutar Panchayat Corruption MP: सिंगरौली (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत खुटार में ₹1 करोड़ 26 लाख की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब न्यायिक स्तर पर बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने सिंगरौली कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को सख्त निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश जारी किया है कि आदेश की प्रति मिलने की तिथि से 60 दिनों के भीतर मामले में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही कर आवेदक को लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
RTI से हुआ खुलासा, 40 बिंदुओं पर अनियमितता का आरोप
मामले के याचिकाकर्ता लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज प्राप्त किए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर ग्राम पंचायत खुटार में निर्माण कार्यों और फंड आवंटन में कुल 40 बिंदुओं पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और गबन का पता चला था।
याचिकाकर्ता ने इन सभी सबूतों के साथ जिला पंचायत सीईओ को एक विस्तृत जांच प्रतिवेदन सौंपा था। शिकायत के आधार पर जिला पंचायत द्वारा 6 सदस्यीय जांच दल का गठन भी किया गया, जिसने कुछ बिंदुओं पर प्राथमिक जांच की थी।
5 महीने बीतने के बाद भी नहीं मिली जांच रिपोर्ट, पहुंचे कोर्ट
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच दल ने सभी 40 बिंदुओं की निष्पक्ष और समुचित जांच नहीं की। अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किया गया था कि जांच पूरी होने के सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। हालांकि, लगभग पांच महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें जांच रिपोर्ट सौंपी गई और न ही दोषी पाए गए अधिकारियों/जनप्रतिनिधियों पर किसी स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी दी गई।
बार-बार जिला पंचायत सीईओ कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काटने व आवेदन देने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो विवश होकर उन्होंने उच्च न्यायालय जबलपुर का दरवाजा खटखटाया।
60 दिनों के आदेश से मचा प्रशासनिक हड़कंप
हाईकोर्ट द्वारा 60 दिनों की समय-सीमा तय किए जाने के बाद अब समूचे सिंगरौली जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किस प्रकार करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन द्वारा कराई जाने वाली विस्तृत जांच में ₹1.26 करोड़ के गबन के तथ्य साबित होते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों पर गबन और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत बड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई होना तय है।




