Satwas School Uniform Monopoly: देवास में निजी स्कूलों और कान्हा कलेक्शन की सांठगांठ उजागर; 12 स्कूलों की यूनिफॉर्म मिलने पर दुकान सील

VIKASH KHALKHO

Satwas School Uniform Monopoly: बागली/देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के अंतर्गत आने वाले सतवास क्षेत्र से निजी स्कूलों की मनमानी और दुकानदारों की साठगांठ का एक बड़ा मामला सामने आया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद से ही अभिभावकों द्वारा की जा रही लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिला कलेक्टर के सख्त निर्देश पर गठित विशेष जांच दल ने सतवास की एक कपड़ा दुकान पर छापा मारकर उसे सील कर दिया है। जांच के दौरान इस इकलौती दुकान के भीतर से क्षेत्र के 12 प्रतिष्ठित निजी स्कूलों की यूनिफॉर्म (ड्रेस) का भारी स्टॉक बरामद हुआ है, जिसके बाद अब संबंधित स्कूल प्रबंधन भी जांच की जद में आ गए हैं।

संयुक्त टीम ने मारा छापा, नहीं मिले खरीद-बिक्री के दस्तावेज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला कलेक्टर के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला परियोजना समन्वयक (DPC) अजय मिश्रा के नेतृत्व में शिक्षा विभाग, राजस्व और स्थानीय पुलिस प्रशासन की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने सतवास स्थित ‘कान्हा कलेक्शन’ नामक प्रतिष्ठान पर औचक दबिश दी।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जब जांच दल ने दुकान के भीतर तलाशी ली तो वहां एक के बाद एक कुल 12 अलग-अलग निजी स्कूलों के मोनोग्राम लगी यूनिफॉर्म के सेट बरामद हुए। जब टीम ने दुकान संचालक से इतनी बड़ी संख्या में विशिष्ट स्कूलों की ड्रेस रखने और उनकी अधिकृत डीलरशिप से जुड़े वैध दस्तावेज या लिखित अनुबंध (अभिलेख) प्रस्तुत करने को कहा, तो वह कोई भी कागजात पेश नहीं कर सका। दुकानदार ने मौखिक रूप से 12 स्कूलों की ड्रेस बेचने की बात तो कबूल की, लेकिन लिखित प्रमाण न होने और कलेक्टर के प्रतिबंधात्मक आदेशों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल दुकान को सील (Seal) करने की कार्रवाई पूरी की।सतवास में एक ही दुकान पर 12 स्कूलों की यूनिफॉर्म, शिकायतों के बाद जांच में खुलासा; प्रशासन ने किया सील

स्कूलों की भूमिका की भी शुरू हुई गहन जांच

‘कान्हा कलेक्शन’ पर हुई इस कार्रवाई के बाद जांच टीम की सुई उन निजी स्कूलों की तरफ भी घूम गई है, जिनकी यूनिफॉर्म वहां बेची जा रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई के तत्काल बाद क्षेत्र के कुछ संदिग्ध निजी स्कूलों का भी औचक निरीक्षण किया और उनके रिकॉर्ड खंगाले।

शिकायत मिलने पर दर्ज होगी सीधे FIR:

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए डीपीसी अजय मिश्रा ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि शासन और जिला प्रशासन का यह स्पष्ट आदेश है कि किसी भी अभिभावक को किसी नियत या एकलौती दुकान से ही यूनिफॉर्म, जूते, ताई या किताबें खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से विवश नहीं किया जा सकता। यदि जिले में कहीं से भी ऐसी शिकायत मिलती है कि स्कूल प्रबंधन किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए पालकों पर दबाव बना रहा है, तो उस स्कूल प्रबंधन के खिलाफ न केवल विभागीय जांच होगी बल्कि सीधे पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नाम गोपनीय, लेकिन जांच का दायरा बढ़ा

फिलहाल प्रशासन ने पूरी विधिक प्रक्रिया और अग्रिम जांच पूरी होने तक उन 12 निजी स्कूलों के नामों को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया है जिनकी ड्रेस दुकान पर जब्त की गई हैं। लेकिन इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से सतवास और बागली क्षेत्र के उन तमाम निजी स्कूल संचालकों और स्टेशनरी-कपड़ा माफियाओं में हड़कंप मच गया है, जो नए सत्र के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का ताना-बाना बुनते हैं। प्रशासन की इस मुस्तैदी की स्थानीय अभिभावक संघों ने जमकर सराहना की है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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