Tuesday, September 1, 2026
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KTUJM Research Seminar: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पीएचडी प्री-सबमिशन सेमिनार; चार शोधार्थियों ने प्रस्तुत किया अपना शोध

KTUJM Research Seminar: रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के जनसंचार शोध केंद्र द्वारा पीएचडी (Ph.D.) शोधार्थियों के लिए एक दिवसीय प्री-सबमिशन सेमिनार का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक आयोजन में चार शोधार्थियों ने अपने-अपने विशिष्ट शोध विषयों पर शोध कार्यों का जीवंत प्रस्तुतीकरण किया। कार्यक्रम के दौरान अकादमिक क्षेत्र के वरिष्ठ विषय विशेषज्ञों और विभागीय शोध समिति (DRC) के सदस्यों ने इन शोध कार्यों की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की। विशेषज्ञों ने शोध को अधिक प्रामाणिक, प्रभावी, मौलिक और समाज के लिए उपयोगी बनाने के दृष्टिकोण से शोधार्थियों को कई आवश्यक और व्यावहारिक सुझाव प्रदान किए।

स्मार्टफोन के प्रभाव से लेकर जनजातीय लोकसंचार परंपरा पर शोध

सेमिनार के तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय के चार पंजीकृत शोधार्थियों ने अपने शोध प्रबंध के निष्कर्षों को साझा किया:

  • विकास कुमार: इन्होंने “जनजातीय समुदायों में लोकसंचार परंपराओं का अध्ययन (छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के विशेष संदर्भ में)” विषय के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के संचार माध्यमों को प्रस्तुत किया।
  • दीक्षा देशपांडे: इन्होंने “बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु से उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन” विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण देकर आधुनिक दौर की एक गंभीर समस्या को रेखांकित किया।

  • विनोद सावंत: इन्होंने “भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयामों का समीक्षात्मक अध्ययन” के अंतर्गत ट्रांसपोर्टेशन और विजुअल कम्युनिकेशन के अंतर्संबंधों को सामने रखा।

  • सैयद अमीर मुस्तफ़ा हाशमी: इन्होंने “ए कम्पेरेटिव स्टडी ऑन बेटरमेंट ऑफ सोसायटी थ्रू कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कम्युनिकेशन इन छत्तीसगढ़ एंड झारखंड” विषय पर अपना तुलनात्मक शोध कार्य प्रस्तुत किया।

शोध केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित न रहे: प्रो. डॉ. अशोक प्रधान

कार्यक्रम में मुख्य विशेषज्ञ के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर की मानव विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अशोक प्रधान उपस्थित रहे। उन्होंने चारों शोधार्थियों के प्रस्तुतीकरण का बारीकी से मूल्यांकन किया। डॉ. प्रधान ने शोध पद्धति (Research Methodology), संदर्भ सामग्री की प्रामाणिकता, शोध की मौलिकता, डेटा विश्लेषण की गुणवत्ता और उसकी सामाजिक उपयोगिता के विभिन्न तकनीकी आयामों पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखे।

विशेषज्ञ का संदेश:

शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए प्रो. डॉ. अशोक प्रधान ने कहा कि कोई भी गुणवत्तापूर्ण शोध केवल एक शैक्षणिक डिग्री या उपलब्धि हासिल करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक शोध वही है जो समाज की समस्याओं का समाधान करे, सरकारी नीतियों के निर्धारण (Policy-making) में सहयोग दे और अकादमिक जगत के ज्ञान-विस्तार में अपना एक सार्थक व सकारात्मक योगदान दर्ज कराए।

वरिष्ठ प्राध्यापकों ने किया शोधार्थियों का परिष्कार

इस अवसर पर विभागीय शोध समिति (डीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती, सदस्य डॉ. आशुतोष मंडावी एवं डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी एक-एक कर सभी शोधार्थियों के अध्यायों की समीक्षा की और शोध प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले आवश्यक तकनीकी सुधार और भाषाई परिष्कार संबंधी दिशा-निर्देश दिए।

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष श्री पंकज नयन पांडे तथा जनसंपर्क विभाग के डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने भी शोधार्थियों का मनोबल बढ़ाते हुए उनके निष्कर्षों को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के टिप्स साझा किए। सेमिनार के अंतिम चरण में विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षकों, अन्य वरिष्ठ शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया और प्रस्तुत विषयों पर विचार-विमर्श करते हुए शोधार्थियों से उनके शोध कार्यों से संबंधित प्रासंगिक प्रश्न पूछे, जिनका शोधार्थियों ने सप्रमाण उत्तर दिया।

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