Sunday, September 27, 2026
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FSL Raigarh: रायगढ़ FSL में वैज्ञानिक जांच शुरू: लैलूंगा थाने का गांजा परीक्षण के लिए पहुंचने वाला पहला केस; अब स्थानीय स्तर पर मिलेंगे फॉरेंसिक साक्ष्य, बिलासपुर के चक्करों से मुक्ति

FSL Raigarh: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़: रायगढ़ में नवस्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) में वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया का विधिवत शंखनाद हो गया है। अब रायगढ़ सहित सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के थानों में जप्त किए जाने वाले व्हीसरा, नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) तथा अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच के लिए बिलासपुर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत 17 जून 2026 को थाना लैलूंगा द्वारा एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के एक मामले में जप्त गांजे को परीक्षण के लिए क्षेत्रीय एफएसएल में जमा कराया गया। थाना प्रभारी लैलूंगा, उप निरीक्षक गिरधारी साव ने स्वयं अपने स्टाफ के साथ पहुंचकर इसे जमा कराया, जो इस नवनिर्मित प्रयोगशाला में जांच के लिए आने वाला पहला आधिकारिक मादक पदार्थ बन गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था शुभारंभ

उल्लेखनीय है कि बीते 17 मई 2026 को ‘सुशासन तिहार’ के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ के राजमहल के समीप इस अत्याधुनिक क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला का विधिवत उद्घाटन किया था। इस लैब में वर्तमान में एनडीपीएस (नारकोटिक्स), केमिस्ट्री और बायोलॉजी (सेरोलॉजी, सीमेन एवं ब्लड) से जुड़े हुए जटिल परीक्षणों की शुरुआत की गई है। स्थानीय स्तर पर फॉरेंसिक लैब की उपलब्धता होने से पुलिस को बेहद कम समय में सटीक वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट मिल सकेगी, जिससे केस डायरी मजबूत होगी और पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल पाएगा।

विवेचना की समय-सीमा में आएगी कमी

अब तक रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पुलिस को किसी भी प्रकार के ब्लड सैंपल, व्हीसरा, स्लाइड, मादक पदार्थ या अल्कोहल परीक्षण के लिए सैंपल बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने पड़ते थे। बिलासपुर में अत्यधिक कार्यभार होने के कारण रिपोर्ट मिलने में लंबा समय लग जाता था, जिससे अदालतों में मामले लंबित रहते थे। अब अधिकांश वैज्ञानिक परीक्षण स्थानीय स्तर पर ही हो जाने से विवेचना की समय-सीमा में भारी कमी आएगी और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक तथा प्रभावी बनेगी। सीन ऑफ क्राइम यूनिट रायगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि वर्तमान आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका बहुत बढ़ गई है, ऐसे में यह लैब पुलिसिंग व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त करेगी।

नए कानूनों (BNS, BNSS, BSA) के तहत फॉरेंसिक जांच रीढ़ की हड्डी: एसएसपी

रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए एक विशेष संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि—

“देश में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के लागू होने के बाद अपराध अनुसंधान पूरी तरह से वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) हो गया है। अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए न्यायालय में विश्वसनीय फॉरेंसिक सबूतों का होना अनिवार्य है। रायगढ़ में क्षेत्रीय FSL की शुरुआत आधुनिक, तकनीक-संचालित और वैज्ञानिक पुलिसिंग की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे गंभीर अपराधों की जांच को गति मिलेगी, अभियोजन पक्ष को मजबूती मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी होगी।”

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