Morena School: मुरैना। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मुरैना जिले के पोरसा विकासखंड के शासकीय विद्यालय रैपुरा से सामने आए एक मामले ने स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विद्यालय में बच्चों को थाली में भोजन परोसने के बजाय उनके हाथों में ही रोटियां थमा दी जाती हैं, जिसके बाद वे उसी तरह भोजन करने को मजबूर हैं। मामले की शिकायत कलेक्टर से की गई है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण नरेंद्र सिंह तोमर ने मुरैना कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर विद्यालय में संचालित मिड-डे मील योजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि बच्चों को सम्मानजनक तरीके से भोजन उपलब्ध कराने के बजाय उनके हाथों में रोटियां देकर खाना परोसा जा रहा है, जो न केवल बच्चों की गरिमा के खिलाफ है बल्कि सरकारी योजना के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े करता है।
Morena School: शिकायतकर्ता का आरोप है कि विद्यालय में मिड-डे मील का संचालन करने वाले स्व-सहायता समूह और संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भोजन वितरण की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है और बच्चों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा।
पढ़ाई भी हो रही प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में केवल भोजन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि स्कूल में व्यवस्थाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित स्व-सहायता समूह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
योजना की गरिमा पर उठे सवाल
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक और सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि बच्चों का पोषण स्तर बेहतर हो और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़े। लेकिन रैपुरा विद्यालय से सामने आए आरोपों ने इस योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।
प्रशासन की जांच का इंतजार
Morena School: फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि शिकायत मिलने के बाद अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो बच्चों के हितों के लिए आगे भी आवाज उठाई जाएगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन जांच में क्या तथ्य सामने लाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं स्थानीय लोगों ने विद्यालय की भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग भी की है।




