मुंबई : बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election 2025) से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। दरअसल जहां उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने की संभावनाओं ने विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) में उथल-पुथल बढ़ा दी है। वहीं ऐसा माना जा रहा है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे इस बार उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है और अब उसने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
कांग्रेस का बड़ा ऐलान: बीएमसी चुनाव अकेले लड़ेंगे
इस बाबत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने साफ-साफ कहा कि बीएमसी चुनाव में कांग्रेस किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। उन्होंने दावा किया कि मुंबई कांग्रेस ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि पार्टी स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी।इस बाबत उन्होंने कहा, “मुंबई दुनिया की सबसे बड़ी महानगरपालिका है। हमारे स्थानीय नेताओं ने तय किया है कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। इसलिए सीट बंटवारे का सवाल ही नहीं उठता।”ऐसे में कांग्रेस के इस बयान से यह भी संकेत मिल रहा है कि MVA के भीतर खींचतान बढ़ गई है और समय के साथ यह गठबंधन कमजोर पड़ता दिख रहा है।
देखा जाए तो महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस का संबंध हमेशा सहज नहीं रहा, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों ने दोनों को एक-दूसरे के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में बदल दिया। साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता गठन के दौरान कांग्रेस की हिचकिचाहट के बावजूद, उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेतृत्व — सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अशोक चव्हाण — के साथ एक भरोसेमंद रिश्ता बनाया। इसी के आधार पर महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन अस्तित्व में आया।
ठाकरे बनाम ठाकरे क्या अब साथ?
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच वर्षों पुरानी दूरी कम होने की खबरों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अगर दोनों भाई साथ आते हैं तो बीएमसी चुनाव में शिवसेना (UBT) – MNS का गठबंधन बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
MVA के सहयोगी दलों—कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट)—ने पहले ही साफ कर दिया था कि राज ठाकरे के साथ गठबंधन उन्हें स्वीकार नहीं है। लेकिन उद्धव ठाकरे की राजनीतिक मजबूरी और बीएमसी पर पुन: कब्जे की चाह इस समीकरण को बदल सकती है।
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क्या MVA टूटने की कगार पर?
कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले ने संकेत दे दिया है कि MVA का भविष्य संकट में है।यदि उद्धव-राज की जोड़ी वाकई साथ आती है, तो MVA का पारंपरिक वोट बैंक भी बंट सकता है।
इस बाबत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, उद्धव और राज की साझेदारी बीजेपी-शिंदे शिवसेना के लिए सीधी चुनौती बनेगी कांग्रेस का अलग लड़ना विपक्षी वोटों को बांट सकता है MVA के भीतर अविश्वास बढ़ने से 2025 विधानसभा चुनावों की रणनीति भी प्रभावित होगी।
बीएमसी पर कब्जे की लड़ाई और महाराष्ट्र की राजनीति
बीएमसी चुनाव सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जाता है। 25 वर्षों तक बीएमसी पर शिवसेना का कब्जा रहा है, और उद्धव ठाकरे इसे फिर अपने हाथ में लाना चाहते हैं।ऐसे में राज ठाकरे का साथ उनके लिए शक्ति बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। लेकिन कांग्रेस के अलग मोर्चा खोलने से विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं, और इसका सीधा फायदा बीजेपी-शिंदे गठबंधन को मिल सकता है।









