Thursday, September 10, 2026
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M.P में गेहूं खरीदी की नई रणनीति! छोटे किसानों को प्राथमिकता, सियासत गरमाई

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश में इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। राज्य को करीब 78 लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य मिला है, जबकि 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग की गई है।

छोटे किसानों को पहले मौका

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि इस बार खरीदी प्रक्रिया में छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है, उन्हें पहले स्लॉट मिलेगा, जबकि बड़े किसानों को बाद में मौका दिया जाएगा।

चुनौतियां और सरकारी दावे

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और निर्यात में कमी के कारण व्यवस्थाओं पर दबाव पड़ा है। साथ ही बारदाने की कमी और अधिक उत्पादन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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क्या नई नीति पर्याप्त है?

हालांकि यह नीति छोटे किसानों के लिए राहत मानी जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे खरीदी प्रक्रिया सुचारू हो पाएगी या फिर बड़े किसानों में असंतोष बढ़ेगा?

कांग्रेस के आरोप और विवाद

इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि नए नियमों से किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सैटेलाइट सत्यापन में गड़बड़ी और स्लॉट बुकिंग में दिक्कतों का मुद्दा उठाया है।

सत्यापन और भुगतान पर सवाल

कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि कई जगहों पर कागजों में कम खरीदी दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविक उत्पादन ज्यादा है। किसानों को भुगतान में देरी और उपज वापस ले जाने की समस्या भी सामने आ रही है।

विरोध की तैयारी

इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन और उपवास का ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

आगे की राह

सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य खरीदी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है, लेकिन इसके सफल होने के लिए पारदर्शिता, समय पर भुगतान और सही सत्यापन बेहद जरूरी होगा। वरना यह नीति विवादों में उलझ सकती है।

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