Lormi Electricity Crisis: लोरमी वन विभाग की लापरवाही से दस घंटे बिजली गुल तपती गर्मी में बेहाल हुई शहर की जनता

Lormi Electricity Crisis: लोरमी। मुंगेली जिले के लोरमी शहर में वन विभाग की तानाशाही और लचर कार्यप्रणाली के कारण रविवार को पूरे नगर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। क्षेत्र के विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री अरुण साव जहाँ एक तरफ क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए लगातार पसीना बहा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोरमी के एसी कमरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारी उनके प्रयासों पर पानी फेरने में लगे हैं। लोरमी से लेकर खम्ही तक चल रहे फोर लेन सड़क चौड़ीकरण कार्य के तहत वन विभाग द्वारा बिना बिजली विभाग को भरोसे में लिए और बिना किसी पूर्व मुनादी के लोरमी नगर पालिका क्षेत्र के भीतर सैकड़ों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई शुरू कर दी गई। इस अदूरदर्शी कार्रवाई के चलते बिजली विभाग के चार पोल टूट गए और भीषण गर्मी के बीच लोरमी शहर की जनता को लगातार 10 घंटे तक बिना बिजली के हलाकान होना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोरमी विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों विकास कार्य अत्यंत तीव्र गति से संचालित हो रहे हैं। इसी क्रम में लोरमी-खम्ही मार्ग को फोर लेन सड़क में तब्दील करने का काम जारी है। सड़क के दायरे में आने वाले बाधाओं को हटाने की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। लेकिन वन विभाग के मैदानी अमले ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए न तो शहर के भीतर रहने वाले नागरिकों को पेड़ कटाई की पूर्व सूचना दी और न ही बिजली विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया। रविवार सुबह जैसे ही अचानक पेड़ों की कटाई शुरू हुई, विशालकाय डालियां मुख्य विद्युत लाइनों पर आ गिरीं, जिससे कड़कड़ाती आवाज के साथ बिजली के चार खंभे जमींदोज हो गए।

बिजली विभाग भेजेगा नोटिस, रेंजर ने झाड़ा पल्ला

इस पूरे मामले में जब बिजली विभाग के आला अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने वन विभाग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। बिजली विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि पेड़ काटने से पहले वन विभाग द्वारा उन्हें कोई लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी गई थी। यदि विभाग को पहले से अवगत कराया जाता, तो शटडाउन लेकर सुरक्षित तरीके से काम कराया जा सकता था। बिना अनुमति की गई इस मनमानी से विभाग को बड़ा वित्तीय नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई के लिए वन विभाग को जल्द ही एक कड़ा कानूनी नोटिस थमाया जाएगा। दूसरी तरफ, पूरे मामले पर जब लोरमी रेंजर ऋतु वर्मा से बात की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके द्वारा विभाग को पूर्व में जानकारी दे दी गई थी, परंतु बिजली विभाग की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

अफसरशाही की भेंट चढ़ रही उपमुख्यमंत्री की मेहनत

स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोरमी में इन दिनों अफसरशाही अपने चरम पर है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव लोरमी के विकास के लिए जो ऐतिहासिक स्वीकृतियां दिल्ली और रायपुर से ला रहे हैं, जमीनी स्तर पर बैठे अधिकारी अपनी मनमानी से उस पर पतीला लगा रहे हैं। जो विकास कार्य पिछले 30 वर्षों में नहीं हुआ, वह महज कुछ महीनों में धरातल पर दिखने लगा है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों की इस गंभीर लापरवाही ने शासन की छवि को धूमिल करने का काम किया है। झुलसाने वाली गर्मी के बीच 10 घंटे तक बिना पंखे और पानी के तड़पती जनता अब इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रही है।

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