बुरहानपुर: मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनर्स की समस्याओं को लेकर सेवा निवृत्त अधिकारी कर्मचारी पेंशनर्स महासंघ ने राज्य सरकार से लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की अपील की है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इन मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो पेंशनर्स को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
प्रमुख मांगें
महासंघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
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राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(8)(ए) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य से असहमति की बाध्यता समाप्त करना।
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केंद्र सरकार के समान स्वीकृति दिनांक से डीए और डीआर का लाभ देना।
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65 वर्ष से 20 प्रतिशत पेंशन वृद्धि प्रदान करना।
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पेंशनर्स की मृत्यु के बाद 50 हजार रुपये एक्सग्रेसिया राशि का भुगतान।
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छठवें वेतनमान का 32 माह का एरियर उच्च न्यायालय और केबिनेट के निर्णय के अनुसार शीघ्र भुगतान।
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सातवें वेतनमान के 27 माह का एरियर, 65 वर्ष के बाद आयुष्मान योजना का लाभ।
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शिक्षकों को 35 वर्ष सेवा के बाद चतुर्थ वेतनमान और अर्जित अवकाश नकदीकरण।
महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री दिलीप इंगले ने बताया, “पेंशनर्स की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। बार-बार निवेदन के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। इससे प्रदेश के पेंशनर्स में भारी असंतोष है। अगर जल्द निराकरण नहीं हुआ, तो पेंशनर्स को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।”
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आंदोलन की चेतावनी
महासंघ ने स्पष्ट किया कि सरकार की चुप्पी और लंबित लाभों के कारण पेंशनर्स सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल अपील नहीं बल्कि चेतावनी है कि अगर राज्य सरकार जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाती, तो पेंशनर्स का आंदोलन अवश्य होगा।
अब देखना यह होगा
अब सवाल यह उठता है कि प्रदेश सरकार पेंशनर्स की इन मांगों पर कब और क्या फैसला लेती है। अगर समय रहते कोई ठोस निर्णय नहीं आया, तो बुजुर्ग पेंशनर्स आंदोलन की राह अपनाने के लिए तैयार हैं।













