उज्जैन : उज्जैन की पवित्र भूमि शनिवार तड़के 29 नवंबर 2025 को एक बार फिर भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती की भव्यता का साक्षी बनी। सुबह 4 बजे जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयकारों और भक्तों की उमंग से गूँज उठा। हजारों श्रद्धालु इस पावन क्षण को प्रत्यक्ष देखने के लिए उज्जैन पहुँचे और स्वयं को धन्य महसूस किया।
वैदिक मंत्रों और दिव्य भस्म के साथ सम्पन्न हुआ अभिषेक
प्राचीन वैदिक परंपराओं के अनुसार पुजारियों ने भगवान महाकाल के शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक किया। इसके पश्चात दिव्य भस्म से विशेष श्रृंगार किया गया जो भस्म आरती की पहचान है। रुद्राष्टक, रुद्रपाठ और शिव तांडव स्तोत्र के मंत्रोच्चार ने गर्भगृह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। गर्भगृह से निकलती दिव्य ध्वनि और कंपन ने भक्तों को अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
देशभर से उमड़े भक्त, प्रथम दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें
महाकाल की भस्म आरती पूरे भारत में अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और दक्षिण भारत के कई राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुँचे।कई श्रद्धालु रातभर कतारों में खड़े रहे ताकि वे आरती के दौरान प्रथम पंक्ति में बैठकर भगवान महाकाल का अलभ्य दर्शन कर सकें।बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की और दर्शनों को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ कीं।
ऑनलाइन प्रसारण से जुड़े लाखों भाविक, तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम
जो भक्त उज्जैन नहीं पहुँच पाए, वे मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण के माध्यम से इस दिव्य अनुष्ठान से जुड़े।देश-विदेश के लाखों भक्तों ने भस्म आरती का सीधा दर्शन कर अपने मन को आध्यात्मिक शांति और भक्ति से भर लिया।विदेशों में बसे भारतीयों के लिए यह लाइव प्रसारण महाकाल के सान्निध्य का विशेष अवसर बना।तकनीक और परंपरा का यह संगम 29 नवंबर की भस्म आरती को और भी यादगार बना गया।













