Madhya Pradesh Tourism : इंदौर। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर में रंगपंचमी का उत्साह एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर है। शहर की ऐतिहासिक और 77 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए आज ‘गेर’ का पहला जुलूस गिरी परिवार की ओर से निकाला गया। रंग, गुलाल और बेपनाह उत्साह से सराबोर यह पारंपरिक गेर जब शहर के हृदय स्थल राजवाड़ा पहुंची, तो वहां का नजारा देखते ही बन रहा था। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े और पूरा शहर मानों रंगों की चादर में लिपट गया।
सात दशक पुरानी सांस्कृतिक विरासत करीब सात दशक से भी अधिक समय से चली आ रही यह ‘गेर’ इंदौर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। ढोल-ताशों की थाप, हवा में उड़ता गुलाल और पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे लोग इंदौर की जीवंत उत्सवप्रियता और गंगा-जमुनी संस्कृति का परिचय दे रहे थे। इस पारंपरिक जुलूस को देखने के लिए न केवल स्थानीय निवासी, बल्कि देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में पर्यटक इंदौर पहुंचे हैं।
सुरक्षा के कड़े पहरे में उत्सव आयोजन की विशालता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पूरे गेर मार्ग की निगरानी के लिए करीब 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों और गेर मार्ग पर लगभग 4000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक सुरक्षित माहौल में इस उत्सव का आनंद ले सकें।
विरासत और उल्लास का संगम इंदौर की ‘गेर’ सिर्फ एक जुलूस मात्र नहीं है, बल्कि यह शहर की विरासत और सामूहिकता का प्रतीक है। राजवाड़ा के ऐतिहासिक प्रांगण में जब रंग और पानी की बौछारें शुरू हुईं, तो हर कोई इस मस्ती में सराबोर नजर आया। प्रशासन और आयोजकों की मुस्तैदी के बीच रंगपंचमी का यह पर्व इंदौर की सांस्कृतिक एकता को और भी मजबूत करता दिखाई दे रहा है।











