Sleemanabad Tunnel: कटनी से ऐतिहासिक उपलब्धि देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद वाटर टनल का निर्माण पूरा, विंध्य के 5 जिलों तक पहुंचेगा नर्मदा का जल

Anuj Nirala

Sleemanabad Tunnel: कटनी। मध्य प्रदेश के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। कटनी जिले में निर्माणाधीन देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद वाटर टनल (Sleemanabad Water Tunnel) का निर्माण कार्य आखिरकार पूरा हो गया है। लगभग 15 वर्षों तक चली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने के साथ ही पहली बार नर्मदा नदी का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। इस परियोजना से कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा सहित पांच जिलों के लाखों लोगों को पेयजल और किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा।

15 वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता

स्लीमनाबाद वाटर टनल परियोजना को नर्मदा घाटी विकास परियोजना के तहत वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली थी। इसके बाद वर्ष 2011 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तकनीकी चुनौतियों और कई बाधाओं के बावजूद वर्ष 2026 में यह परियोजना पूरी हो गई। इसे मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।

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करीब 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग

Sleemanabad Tunnel: करीब 11.95 किलोमीटर लंबी यह भूमिगत सुरंग देश की सबसे लंबी वाटर टनलों में शामिल है। यह बरगी व्यपवर्तन (Diversion) योजना का अहम हिस्सा है। टनल के माध्यम से नर्मदा का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा, जिससे लंबे समय से जल संकट झेल रहे इलाकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

5 जिलों के लाखों लोगों को मिलेगा लाभ

परियोजना के शुरू होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही हजारों किसानों की कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

कठिन चट्टानों और 300 से ज्यादा सिंकहोल बने चुनौती

Sleemanabad Tunnel: इस परियोजना का निर्माण आसान नहीं था। टनल निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कठोर चट्टानों, 300 से अधिक सिंकहोल और जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। निर्माण के लिए अत्याधुनिक विदेशी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन कई स्थानों पर तकनीकी चुनौतियों के कारण मशीनों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद इंजीनियरों और तकनीकी टीमों ने लगातार प्रयास कर परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया।

लागत बढ़कर पहुंची करीब 1500 करोड़ रुपये

परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, लेकिन लंबे निर्माण काल, तकनीकी बदलावों और अतिरिक्त कार्यों के चलते इसकी लागत बढ़कर करीब 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद सरकार ने परियोजना को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

अप और डाउन सेक्शन का कार्य हुआ पूरा

Sleemanabad Tunnel: स्लीमनाबाद से शुरू हुई इस टनल के निर्माण में अप और डाउन दोनों सेक्शन पर समानांतर कार्य किया गया। डाउन सेक्शन का निर्माण पहले पूरा हुआ, जबकि अब अप सेक्शन भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद टनल निर्माण में उपयोग की गई विशाल रिंग मशीन (Tunnel Boring Machine) भी बाहर निकाल ली गई है, जो इस परियोजना के पूर्ण होने का संकेत है।

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विंध्य क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई गति

Sleemanabad Tunnel: विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से विंध्य क्षेत्र में जल संकट काफी हद तक कम होगा। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही पेयजल की उपलब्धता बेहतर होने से लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। यह परियोजना मध्य प्रदेश की जल प्रबंधन नीति और आधारभूत संरचना विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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