Shikshak Sangathan Against TET Rule: जब कार्यरत शिक्षकों के लिए परीक्षा ही नहीं हुई, तो पदोन्नति में क्यों थोपी जा रही शर्त? – उपेंद्र कौशल

VIKASH KHALKHO

Shikshak Sangathan Against TET Rule: भोपाल। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की पदोन्नति (प्रमोशन) को लेकर जारी किए गए एक नए पत्र ने राज्य के कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश और असंतोष पैदा कर दिया है. विभाग द्वारा प्रमोशन की कड़ियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जोड़ने के संकेत मिलने के बाद शासकीय शिक्षक संगठन खुलकर विरोध में उतर आया है. संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि विभाग के इस अपरिपक्व कदम से पूरे प्रदेश के लाखों शिक्षकों में भारी भ्रम और असमंजस की स्थिति बन गई है.

आदेश से बनी गंभीर भ्रम की स्थिति

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में पदोन्नति के लिए ‘TET क्वालीफाई’ शिक्षकों की जानकारी (डेटा) जिला स्तर से मांगी जा रही है. इस आदेश के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है. उन्होंने सीधे तौर पर विभाग से सवाल पूछा कि क्या शिक्षा विभाग अब पुरानी सेवा शर्तों को ताक पर रखकर पदोन्नति में भी TET को अनिवार्य करने की तैयारी कर रहा है? यदि ऐसा है, तो विभाग के इस रुख से पूरा शिक्षक समाज मानसिक रूप से बेहद परेशान और आक्रोशित है.

“जब परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई, तो अनिवार्यता क्यों?”

उपेंद्र कौशल ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल दागते हुए कहा:

“अब तक विभाग में कार्यरत पुराने और अनुभवी शिक्षकों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कभी भी TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का आयोजन तक नहीं किया गया है। जब विभाग ने शिक्षकों को परीक्षा में बैठने का अवसर ही आयोजित नहीं कराया, तो प्रमोशन के समय इसकी अनिवार्यता लागू करने का क्या विधिक औचित्य है? बिना परीक्षा का मौका दिए इस तरह की कठिन शर्तें थोपना पूरी तरह से अनुचित और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।”

कर्मचारी संगठन की प्रमुख मांगें और आंदोलन की चेतावनी

शिक्षकों में बढ़ते गुस्से और संशय को देखते हुए शासकीय शिक्षक संगठन ने सरकार और विभाग के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. संगठन ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • शिक्षा विभाग तत्काल प्रेस विज्ञप्ति या आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करे कि जिन शिक्षकों ने TET क्लियर नहीं किया है, क्या उनकी पदोन्नति रोकी जाएगी या उन्हें लाभ मिलेगा?

  • वरिष्ठता और पूर्व नियमों के आधार पर होने वाली पदोन्नति की प्रक्रिया से TET की अनिवार्यता को पूरी तरह से मुक्त रखा जाए.

  • शिक्षकों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए सूबे की सरकार इस संवेदनशील विषय पर तत्काल संज्ञान ले और असमंजस दूर करने वाला नया स्पष्टीकरण जारी करे.

संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि स्कूल शिक्षा विभाग ने इस भ्रम की स्थिति को जल्द दूर नहीं किया और अपने आदेश में न्यायसंगत संशोधन नहीं किया, तो प्रदेश भर के शिक्षक संगठन एकजुट होकर सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरने और आगे की उग्र रणनीति तैयार करने पर मजबूर होंगे.

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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