Ayodhya Ram Mandir CEO: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। अयोध्या राम मंदिर CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी के लिए चयन समिति ने नामों का पैनल तैयार कर लिया है।अब इसी पैनल में शामिल नामों में से किसी एक व्यक्ति को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाएगा। मंगलवार 1 सितंबर को यह पैनल ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपे जाने की बात सामने आई है।
2 सितंबर की बैठक में होगा बड़ा फैसला
राम मंदिर के पहले CEO के चयन को लेकर ट्रस्ट की बुधवार 2 सितंबर को अहम बैठक होने वाली है। चयन समिति के तीनों सदस्य अयोध्या पहुंच चुके हैं।बैठक में पैनल में शामिल नामों पर चर्चा के बाद किसी एक नाम को अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।नए CEO की जिम्मेदारी केवल प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। उन्हें मंदिर परिसर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के प्रबंधन, सुरक्षा और वित्तीय कामकाज जैसे अहम मामलों को भी देखना होगा।
5,585 लोगों ने किया था आवेदन
अयोध्या में CEO की नियुक्ति के लिए शुरू की गई प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों ने रुचि दिखाई थी। जानकारी के मुताबिक कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।छंटनी के बाद अंतिम चरण में 16 उम्मीदवार पहुंचे। इन उम्मीदवारों में पूर्व IAS और IPS अधिकारियों के साथ-साथ सेना के रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल थे।अब चयन समिति ने इंटरव्यू और प्रक्रिया के बाद नामों का पैनल तैयार किया है। हालांकि अंतिम नाम पर फैसला ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
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इन नामों की रही सबसे ज्यादा चर्चा
राम मंदिर CEO का चयन कई दिनों से चर्चा में है। इस दौड़ में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय और पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा के नाम सामने आते रहे हैं।राजेश पांडेय का दो बार इंटरव्यू लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक परेश सक्सेना भी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल हुए थे।हालांकि इनमें से कौन चयन समिति के अंतिम पैनल में शामिल है, इसकी आधिकारिक तस्वीर ट्रस्ट के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगी।
चंदा चोरी के बाद तेज हुई थी तलाश
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के CEO की नियुक्ति का फैसला मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे से जुड़े चोरी के कई आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और लगातार बढ़ रहे प्रशासनिक काम को देखते हुए भी यह पद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नए अधिकारी के सामने मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था के साथ सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर तरीके से संभालने की चुनौती होगी।
जगदीश आफले को सचिव बनाने पर भी फैसला संभव
राम मंदिर के पूर्णकालिक CEO के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति पर फैसला हो सकता है।ट्रस्ट की ओर से जगदीश आफले को पहला सचिव नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजा गया है। 2 सितंबर की बैठक में इस प्रस्ताव की पुष्टि होने की संभावना जताई जा रही है।अगर दोनों फैसले होते हैं तो राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
पूर्व जस्टिस की अगुवाई में हुआ इंटरव्यू
अयोध्या मंदिर प्रशासन के नए CEO के चयन के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली कर रहे हैं।समिति में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे भी शामिल हैं। समिति ने 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए थे।इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से मंदिर प्रशासन, प्रबंधन और व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे गए। अब चयन समिति की सिफारिश ट्रस्ट के सामने है।अब सबकी नजर 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर है। इसी बैठक के बाद यह तय हो सकता है कि राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी आखिर किसे मिलेगी।





