नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई आज रिटायर हो रहे हैं। चार दशक लंबे न्यायिक सफर के अंत में उन्होंने खुद को न्याय का विद्यार्थी बताते हुए विदाई ली। उनके अंतिम कार्यदिवस पर भावुक क्षण देखने को मिले।
जस्टिस सूर्यकांत का ऐतिहासिक शपथ ग्रहण
वहीं कल यानी सोमवार, 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक होगा क्योंकि इसमें भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल, श्रीलंका और ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे। पहली बार किसी CJI के शपथ ग्रहण में इतनी बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल मौजूद होगा।
Read More : Raipur Aawas Mela : राजधानी रायपुर में ‘सपनों के घर का महाकुंभ आज से….
लंबित मामलों पर फोकस
इस बाबत जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उनका मुख्य फोकस देशभर की अदालतों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने पर रहेगा। वे ऐसे मामलों की पहचान करेंगे जो न्यायिक प्रक्रिया में वर्षों से बाधा बन रहे हैं। उनका मानना है कि हाईकोर्ट की संवैधानिक भूमिका को समझना आवश्यक है, और सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले अपील हाईकोर्ट में होनी चाहिए।
मीडिएशन और तेज निपटान
वहीँ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिएशन को न्यायिक सुधार का गेम चेंजर बताया। उनका मानना है कि पेंडिंग और प्री-लिटिगेशन केस मीडिएशन से सुलझाए जाने पर कोर्ट का बोझ काफी कम हो जाएगा और लिटिगेंट्स को तेजी से न्याय मिलेगा।
Read More : USA Venezuela Tensions : क्या मादुरो सरकार को उखाड़ने का प्लान कर रहा अमेरिका! कभी छिड़ सकती है वॉर
न्यायपालिका में सुधार और आधुनिक दृष्टिकोण
नए CJI का उद्देश्य न्यायपालिका को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है। इसमें लंबित फाइलों का निपटान, डिजिटल न्याय व्यवस्था का विस्तार और बेंच की दक्षता बढ़ाना शामिल है। जस्टिस सूर्यकांत का यह विजन भारतीय न्यायपालिका के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।









