जयंत परियोजना कांटा नंबर-4 से ओवरलोड कोयले का खेल, अधिकारी और कांटा बाबू की मिलीभगत का आरोप

मनु कुमार/ सिंगरौली, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के ऊर्जा की राजधानी सिंगरौली में जयंत परियोजना के कांटा नंबर-4 से लगातार ओवरलोड कोयला निकाले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि यह खेल एनसीएल अधिकारियों, कांटा बाबू, ट्रांसपोर्टरों और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है।

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ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी

सूत्रों के अनुसार, निर्धारित ईटीपी (खनिज विभाग की तय लोडिंग क्षमता) 22 टन के स्थान पर वाहनों में औसतन 29 टन कोयला भरा जा रहा है, यानी हर गाड़ी में 7 टन अतिरिक्त कोयला लाद दिया जा रहा है। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि कंपनी और सरकार के लिए आर्थिक नुकसान भी पैदा कर रहा है।

  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

  • ओवरलोड वाहन सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।

मिलीभगत का आरोप

सूत्रों का दावा है कि कांटा बाबू ट्रांसपोर्टरों से अवैध वसूली करते हैं और बदले में वाहनों को “अंडर पास” दिखाकर बाहर निकलने की अनुमति देते हैं। एनसीएल के संबंधित कर्मचारी भी अपनी हिस्सेदारी लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप कोयले का अवैध परिवहन बेखौफ तरीके से जारी है और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

सड़क पर खतरा और स्थानीय नाराजगी

ओवरलोड डंपर और हाइवा वाहन अपनी क्षमता से कहीं अधिक कोयला लादकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। इससे सड़कों पर गहरे गड्ढे हो रहे हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जिला प्रशासन और खनिज विभाग से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।

निष्पक्ष जांच की मांग

यह मामला बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार और रोजाना लाखों रुपये के अवैध कोयला खेल की ओर इशारा करता है।

  • कोल कंपनी को नुकसान

  • सरकारी राजस्व पर असर
    संगठनों और स्थानीय समाज की मांग है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अधिकारी की सफाई

डिस्पैच इंचार्ज ने कहा, “हम लोग सिर्फ आरसी बुक में लिखी क्षमता के अनुसार कोयला लोड कराते हैं, ईटीपी की क्षमता से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।”
इस बयान से सवाल उठते हैं कि जब खनिज विभाग और एनसीएल की लोडिंग क्षमता में इतना बड़ा अंतर है, तो यह गड़बड़ी कैसे और क्यों हो रही है।

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