जबलपुर : मेडिकल कॉलेज में सफाई कर्मियों की हड़ताल, गंदगी से जूझा अस्पताल, मरीज हुए परेशान

जबलपुर : जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोमवार को उस वक्त अव्यवस्था फैल गई, जब सफाई कर्मी और वार्ड बॉय अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज परिसर और वार्डों में चारों तरफ गंदगी का आलम नजर आया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वेतन और पीएफ भुगतान को लेकर नाराज कर्मचारी

सफाई कर्मियों और वार्ड बॉय का आरोप है कि उन्हें पिछले कई महीनों से समय पर वेतन नहीं दिया गया है। इसके साथ ही उनके प्रोविडेंट फंड (PF) की राशि भी जमा नहीं की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार मेडिकल प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे मजबूर होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

अस्पताल परिसर में फैली गंदगी

हड़ताल के चलते अस्पताल के वार्ड, गलियारे और परिसर में कचरा जमा होता गया। साफ-सफाई न होने से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कई मरीजों के परिजनों ने बताया कि गंदगी के कारण इलाज के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

कर्मचारियों ने मेडिकल प्रबंधन पर लगाए आरोप

हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने मेडिकल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

मेडिकल प्रशासन ने दिया आश्वासन

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन नवनीत सक्सेना ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि वेतन और पीएफ से जुड़ी शिकायतों को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। डीन ने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों से बातचीत कर जल्द समाधान निकाला जाएगा ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

कर्मचारियों की चेतावनी

वहीं सफाई कर्मचारी लक्ष्मी बेन ने कहा कि आश्वासन पहले भी मिले हैं, लेकिन अमल नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो हड़ताल और तेज की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हड़ताल ने सरकारी अस्पतालों में संविदा कर्मचारियों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि मेडिकल प्रशासन इस संकट से कैसे निपटता है।

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