Iran Nuclear Sites Delta Force : नई दिल्ली। ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है। हालिया इजरायली-अमेरिकी हमलों के बावजूद, ईरान ने अपनी कई परमाणु साइट्स को पहाड़ों की गहराई और मजबूत भूमिगत सुरंगों में सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हवाई हमले इन अड्डों को पूरी तरह निष्क्रिय करने में विफल रहते हैं, तो अमेरिका और इजरायल की स्पेशल फोर्स ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ (जमीन पर हमला) का विकल्प चुन सकती हैं।
मुख्य परमाणु अड्डे और उनकी स्थिति:
| परमाणु साइट | स्थान | विशेषता |
| नतांज (Natanz) | इस्फहान प्रांत | सबसे बड़ा यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) प्लांट; हजारों सेंट्रीफ्यूज। |
| फोर्डो (Fordow) | कुम शहर के पास | 80 मीटर गहरा; पहाड़ों के अंदर बना सबसे सुरक्षित अड्डा। |
| इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर | इस्फहान शहर | यूरेनियम को गैस में बदलने और मेटल बनाने का केंद्र। |
| पार्चिन (Parchin) | तेहरान के पास | हाई एक्सप्लोसिव टेस्टिंग और परमाणु हथियारों के संदिग्ध टेस्ट साइट। |
| मिनजादेई/लविसान-शियन | तेहरान के निकट | अत्यंत गुप्त; परमाणु हथियार विकास प्रोग्राम (SPND) का हिस्सा। |
| अराक (खोंडाब) | तेहरान के पास | हैवी वॉटर रिएक्टर; प्लूटोनियम बनाने में सक्षम। |
स्पेशल फोर्स के संभावित ‘टारगेट ऑपरेशंस’
इन ठिकानों को नष्ट करने या वहां से महत्वपूर्ण सबूत (Evidence) जुटाने के लिए अमेरिका और इजरायल की विशिष्ट बल (Special Forces) अपनी कुशलता के लिए जानी जाती हैं:
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अमेरिका की ‘डेल्टा फोर्स’ (1st SFOD-D): यह यूनिट जटिल सुरंगों और पहाड़ी इलाकों में घुसकर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने में सक्षम है। नतांज की नई ‘पिक्सएक्स माउंटेन’ साइट इनके मुख्य लक्ष्यों में हो सकती है।
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इजरायल की ‘सायरेट मटकल’ (Sayeret Matkal): यह इजरायल की सबसे गोपनीय यूनिट है। फोर्डो जैसे गहरी सुरंगों वाले अड्डों में घुसकर सेंट्रीफ्यूज और हथियार नष्ट करने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है।
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सील टीम 6 (SEAL Team 6): रात के अंधेरे में पैराशूट या हेलीकॉप्टर से उतरकर अचानक हमला करने में यह टीम माहिर है।
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शायेतेट 13 (Shayetet 13): इजरायली नौसेना की यह स्पेशल फोर्स इस्फहान जैसे इलाकों में हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंच बनाने में कारगर हो सकती है।

ऑपरेशन का जोखिम
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) इन स्थलों की सुरक्षा के लिए जमीन-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें और कड़ी निगरानी रखती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन साइट्स पर ऑपरेशन करना किसी ‘आत्मघाती मिशन’ से कम नहीं होगा। हालांकि, नतांज के पास बन रही पिक्सएक्स माउंटेन और फोर्डो जैसी साइट्स, जो 80 से 100 मीटर गहरी हैं, हवाई बमबारी से पूरी तरह नष्ट नहीं हो सकतीं, इसलिए वहां ‘स्पेशल फोर्स’ का उतरना रणनीतिक रूप से अनिवार्य हो सकता है।











