IPS Bushra Bano: कोलकाता। पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी बुशरा बानो का सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक वीडियो चर्चा में आने के बाद विवादों में घिर गया। वीडियो में बुशरा बानो पुलिस की वर्दी में UPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का हौसला बढ़ाती नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने ‘अस्सलामुअलैकुम’, ‘इंशाल्लाह’ और ‘जजाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इन शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई।
IPS Bushra Bano: इसके बाद सोमवार को राज्य सरकार ने बुशरा बानो के तबादले का आदेश जारी कर दिया। हालांकि, सरकारी आदेश में उनके तबादले की वजह स्पष्ट नहीं की गई है और सरकार की ओर से भी इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
खड़गपुर में एडिशनल SP थीं बुशरा बानो
बुशरा बानो 2021 बैच की IPS अधिकारी हैं और इससे पहले वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर में एडिशनल SP के पद पर तैनात थीं। नए आदेश के तहत उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस में डिप्टी कमांडेंट बनाया गया है। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का एडिशनल SP नियुक्त किया गया है।
UPSC अभ्यर्थियों के लिए बनाया था वीडियो
बुशरा बानो ने 13 सितंबर को सोशल मीडिया पर यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने UPSC की तैयारी के दौरान अपने अनुभव साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी ने उनकी तैयारी में मदद की थी। वीडियो अब उनके सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया गया है।
शब्दों के इस्तेमाल पर सोशल मीडिया में आपत्ति
वीडियो सामने आने के बाद ‘हिंदू लीगल फंड’ नाम के एक संगठन ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। संगठन ने दावा किया कि इस मामले में बंगाल के गृह सचिव से शिकायत की गई है। पोस्ट में सरकारी अधिकारी के सार्वजनिक संवाद में निष्पक्षता बनाए रखने की बात कही गई और ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की मांग की गई।
तबादले की वजह पर सरकार ने नहीं दी सफाई
IPS Bushra Bano: वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद के कुछ दिनों बाद बुशरा बानो के तबादले का नोटिफिकेशन जारी हुआ। हालांकि, आदेश में तबादले की वजह नहीं बताई गई है। सरकार की ओर से भी वीडियो विवाद और तबादले के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं की गई है।
IPS Bushra Bano: फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बुशरा बानो के तबादले का सोशल मीडिया वीडियो से कोई सीधा संबंध है या यह नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है। सरकार की आधिकारिक सफाई सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।






