नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-UPI Transaction Charges Clarification: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की खबरों और भ्रम के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों द्वारा आपस में किए जाने वाले व्यक्तिगत लेनदेन (P2P) हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। शुल्क का प्रावधान केवल महज 4 प्रतिशत बड़े मर्चेंट या व्यावसायिक लेनदेन तक ही सीमित रहेगा।
हाल ही में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने की खबरों के बाद सोशल मीडिया और आम जनता के बीच काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। व्यापारियों और उपभोक्ता संगठनों द्वारा जताई गई चिंताओं के बाद वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने आधिकारिक सफाई जारी करते हुए कहा कि आम जनता के रोजमर्रा के पेमेंट्स पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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वित्त मंत्रालय के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, छोटे दुकानदारों और खुदरा विक्रेताओं को किए जाने वाले सामान्य भुगतानों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किए बिना केवल बड़े व्यावसायिक भुगतानों को विनियमित करना है।
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सरकारी सूत्रों ने बताया कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग करने वाले बड़े मर्चेंट पहले से ही 1 से 2 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद बड़े रिटेलर्स आमतौर पर इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालते, बल्कि डिस्काउंट और ईएमआई (EMI) ऑफर्स के जरिए डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देते हैं। सरकार की इस स्पष्टता से करोड़ों यूपीआई उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है।






