IndusInd Bank : नई दिल्ली: इंडसइंड बैंक में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की शुरुआती जांच में पता चला है कि बैंक के पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने अकाउंटिंग बुक्स में एडजस्टमेंट किए जाने की बात स्वीकार की है।
IndusInd Bank : सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह ईओडब्ल्यू ने बैंक के पूर्व सीएफओ गोबिंद जैन, पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना और पूर्व सीईओ सुमंत कथपालिया के बयान दर्ज किए। खुराना को दोबारा समन भी भेजा गया है, क्योंकि उनकी भूमिका को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे बैंक की बुक्स में हुए कथित बदलावों से अवगत थे।
IndusInd Bank : जांच में सामने आया है कि बैंक की फाइनेंशियल बुक्स को दो अलग-अलग हेडर्स में एडजस्ट किया गया था, जिससे बैंक के स्टॉक प्राइस पर असर पड़ा। हालांकि कुछ पूर्व अधिकारियों ने गड़बड़ी में शामिल होने से इनकार किया है।
IndusInd Bank : EOW अब कानूनी विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की योजना बना रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह मामला सत्यम घोटाले से मिलती-जुलती प्रकृति का है।
IndusInd Bank : गौरतलब है कि यह अकाउंटिंग लैप्स सबसे पहले बैंक के डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में पाया गया था, जो बाद में माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट तक फैल गया। इसी वर्ष अप्रैल में मामले के उजागर होने के बाद सीईओ सुमंत कथपालिया और डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
IndusInd Bank : अब तक ईओडब्ल्यू सात से आठ कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनके आधार पर पूर्व अधिकारियों को समन जारी किया गया। संभावना है कि उन्हें आगे और पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
IndusInd Bank : बैंक के पूर्व सीएफओ गोबिंद जैन पहले ही इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने 26 अगस्त को भेजे पत्र में बैंक की ट्रेजरी ऑपरेशंस में वर्षों से चल रही गड़बड़ियों की जानकारी दी थी, जिसकी अनुमानित राशि 2000 करोड़ रुपये बताई गई है।









